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June 21, 2026
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राजिंदर गोयल : रणजी ट्रॉफी में इतिहास रचने वाले गेंदबाज, जिन्हें कभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौका न मिला

राजिंदर गोयल : रणजी ट्रॉफी में इतिहास रचने वाले गेंदबाज, जिन्हें कभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौका न मिला

नई दिल्ली, 19 सितंबर। घरेलू क्रिकेट के महानतम स्पिन गेंदबाजों में शुमार राजिंदर गोयल ने रणजी ट्रॉफी में अपनी गहरी छाप छोड़ी है। उनके नाम सर्वाधिक 637 विकेट लेने का रिकॉर्ड है। बाएं हाथ के स्पिनर गोयल को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कभी खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन इसके बावजूद उन्हें रिकॉर्ड विकेट के लिए भारतीय क्रिकेट जगत में याद किया जाता है।

20 सितंबर 1942 को नरवाना (हरियाणा) में जन्मे राजिंदर गोयल ने उस समय सुर्खियों में आए, जब उन्हें अखिल भारतीय स्कूल टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज चुना गया। इसके बाद 1958-59 में उन्होंने फर्स्ट क्लास करियर की शुरुआत की। महज 16 साल की उम्र में पटियाला की ओर से सर्विसेज के खिलाफ सुरिंदर बाली का विकेट लेकर उन्होंने अपने डेब्यू मैच को यादगार बनाया, जिसके बाद 1962-63 तक वह दिल्ली की ओर से खेलते रहे।

गोयल फिटनेस के लिए जमकर पसीना बहाते थे। वह नेट में कम से कम 10 बल्लेबाजों के लिए गेंदबाजी करते थे। राजिंदर गोयल ने 1964-65 सीजन में नॉर्दर्न पंजाब के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें उनका मुकाबला भारत के दिग्गज बाएं हाथ के स्पिनर बिशन सिंह बेदी से था। इस मुकाबले में राजिंदर गोयल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी को प्रभावित किया। 1973-74 में राजिंदर गोयल हरियाणा चले गए। उन्होंने रेलवे के खिलाफ 55 रन देकर 8 विकेट लिए और एक बार फिर सभी का ध्यान खींचा। उन्हें इस शानदार प्रदर्शन का इनाम मिला और 1974-75 में वेस्टइंडीज के खिलाफ बेंगलुरु टेस्ट के लिए भारतीय टीम में शामिल कर लिया गया, लेकिन राजिंदर प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं बना सके।

1979-80 में किम ह्यूजेस की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत के दौरे पर आई थी। इस दौरान नॉर्थ जोन की ओर से छह विकेट लेकर राजिंदर गोयल ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का प्रमाण दिया। राजिंदर गोयल ने 157 फर्स्ट क्लास मुकाबलों में 18.58 की औसत के साथ 750 विकेट हासिल किए। इस दौरान उन्होंने 59 बार पारी में पांच या इससे अधिक विकेट चटकाए और 18 बार मुकाबले में 10 या इससे ज्यादा विकेट निकाले।

वहीं, 8 लिस्ट-ए मुकाबलों में उन्होंने 14 शिकार किए। राजिंदर गोयल ने करीब 26 सीजन तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला और 44 साल की उम्र में क्रिकेट से संन्यास ले लिया, जिसके बाद गोयल हरियाणा के चयनकर्ता रहे। उन्होंने पुरुष और महिला क्रिकेट में मैच रेफरी के रूप में भूमिका निभाई। राजिंदर गोयल साल 2000 में अंडर-19 विश्व कप के लिए भारतीय टीम चुनने वाली चयन समिति का भी हिस्सा थे। साल 2000 में भारत पहली बार अंडर-19 वर्ल्ड कप चैंपियन बना था। साल 2017 में गोयल को ‘सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। 21 सितंबर 2020 को लंबी बीमारी के बाद राजिंदर गोयल ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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