बालाघाट,प्रदेश सरकार ने कैबिनेट में फैसला लिया है कि भू अर्जन कानून 2013 के तहत दिए जाने वाले मुआवजे में गुणांक (मल्टीफिकेशन फैक्टर) को 1 से बढ़ाकर 2 कर दिया है जिस कारण जमीन का मुआवजा 2 गुना हो जाएगा और इसपर भू अर्जन कानून के तहत 100% तोषण राशि मिलाकर कुल मुआवजा आकलित राशि का चार गुना हो जाएगा। सरकार का यह निर्णय किसान संघर्षों और किसान गर्जना आंदोलन की एक बड़ी जीत है। किसान गर्जना संगठन इस निर्णय का स्वागत करता है और माँग करता है कि इस निर्णय को सन 2014 से हुए अभी तक के सभी भू अर्जन कार्रवाइयों पर लागू कर सभी प्रभावितों को अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए।
क्या है मामला?
किसान गर्जना संगठन के प्रदेश अध्यक्ष श्री अरविंद चौधरी ने बताया कि भू अर्जन कानून 2013 की पहली अनुसूची के क्रमांक 2 के अनुसार किसी भी किसान के आंकलित मुआवजे में एक गुणांक से गुणा किया जाएगा और यह गुणांक शहरी क्षेत्र के लिए 1 और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 1 से 2 तक होगा। परंतु मध्य प्रदेश सरकार ने सन 2014 में इस गुणांक को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी 1 ही घोषित किया जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को बहुत नुकसान हो रहा था।
किसान गर्जना संगठन ने बार बार सरकार के सामने इस विसंगति को उठाते हुए माँग की कि इस गुणांक को 2 किया जाए। संगठन ने बताया कि केंद्र सरकार, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, बिहार आदि राज्यों ने ग्रामीण क्षेत्रों में इस गुणांक को 2 निर्धारित किया है।
प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में गुणांक 2 करने से आंकलित मुआवजा दुगना हो जाएगा और भू अर्जन कानून 2013 के अनुसार 100% तोषण राशि जुड़ने पर कुल 4 गुना हो जाएगा। इस प्रकार पहले तोषण राशि सहित मिलने वाला 2 गुना मुआवजा अब चार गुना हो जाएगा।
पुराने भू अर्जन पर भी लागू हो निर्णय:
अरविंद चौधरी ने कहा कि भू अर्जन कानून,2013 के तहत 1 जनवरी, 2014 से भू अर्जन प्रक्रिया जारी है। अभी तक गुणांक 1 से ही मुआवजे का आंकलन हुआ है जो कि कानून का उल्लंघन है और इस कारण हजारों किसानो का बहुत नुकसान हुआ है। अतः किसान गर्जना संगठन माँग करता है इस निर्णय को सन 2014 से हुए अभी तक के सभी भू अर्जन प्रकरणों में लागू किया जाए और 2014 से अभी तक हुए सभी भू अर्जनों में गुणांक 2 का उपयोग कर मुआवजे का पुनरांकलन कर सभी प्रभावित किसानों को अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए।
किसान गर्जना संगठन राज्य सरकार के इस निर्णय का स्वागत करता है और आशा करता है कि इस निर्णय को 2014 से अभी तक के सभी भू अर्जन प्रकरणों पर लागू कर सभी किसान प्रभावितों को न्याय दिया जायेगा ।


