May 8, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

पश्चिम बंगाल में सुवेंदु सरकार, ममता को लगातार घर में दी मात, फायरब्रांड छवि ने दिलाई पहचान



कोलकाता, 8 मई ()। पश्चिम बंगाल की राजनीति में अगर किसी नेता ने बीते कुछ वर्षों में तेजी से अपना कद बढ़ाया है, तो वह नाम है सुवेंदु अधिकारी। आज वे न सिर्फ राज्य में भाजपा का सबसे प्रमुख चेहरा हैं, बल्कि प्रदेश के नए मुख्यमंत्री भी बनने वाले हैं। कोलकाता में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में सुवेंदु अधिकारी के नाम की घोषणा की। अधिकारी शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण करेंगे।


अधिकारी को ममता बनर्जी के सबसे मुखर आलोचक के तौर पर भी जाना जाता है। लेकिन, एक समय था जब सुवेंदु अधिकारी, ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे। नंदीग्राम और सिंगूर जैसे आंदोलनों में उनकी अहम भूमिका ने ही ममता बनर्जी को राज्य की राजनीति में मजबूत पहचान दिलाई। समय के साथ दोनों नेताओं के रास्ते अलग हो गए। 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव राज्य की सबसे चर्चित लड़ाइयों में शामिल हो गया।

सुवेंदु अधिकारी वैसे नेता हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ में न सिर्फ कड़ी चुनौती दी, लगातार दो विधानसभा चुनाव में करारी मात भी दी। 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर चुनाव लड़ते हुए अधिकारी ने सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टक्कर दी और जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की। इसके बाद इस बार के चुनाव में अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ ही भवानीपुर से उम्मीदवारी पक्की कर ली। भवानीपुर को ममता बनर्जी की सुरक्षित सीट माना जा रहा था। लेकिन, चुनावी नतीजे में सुवेंदु अधिकारी की भवानीपुर से प्रचंड जीत ने ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर पर सवालिया निशान लगा दिया।

पूर्वी मेदिनीपुर जिले में अधिकारी की मजबूत पकड़ और संगठन क्षमता सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। वे उन गिने-चुने नेताओं में हैं, जो जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को संगठित करने और चुनावी समीकरण साधने में माहिर हैं। सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से ही शुरू हो गया। कांथी पीके कॉलेज से स्नातक सुवेंदु अधिकारी ने 1989 में छात्र परिषद के प्रतिनिधि के रूप में अपनी राजनीतिक शुरुआत की।

वर्ष 2006 में वे कांथी दक्षिण सीट से पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद 2009 और 2014 में उन्होंने तमलुक लोकसभा सीट से सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2016 में नंदीग्राम से विधायक बनने के साथ ही वे ममता बनर्जी सरकार में मंत्री बने और परिवहन, सिंचाई और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाला।

2007 का नंदीग्राम आंदोलन सुवेंदु अधिकारी के राजनीतिक करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ‘भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी’ के बैनर तले उन्होंने बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया। इस आंदोलन ने न सिर्फ वाम मोर्चा सरकार को झुकने पर मजबूर किया, बल्कि टीएमसी के सत्ता तक पहुंचने का रास्ता भी तैयार किया।

सुवेंदु अधिकारी एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी कांग्रेस और बाद में टीएमसी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। उनके भाई भी सक्रिय राजनीति में हैं, जिससे पूर्वी मिदनापुर में इस परिवार का व्यापक प्रभाव बना हुआ है।

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