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Jabalpur
June 13, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

कुत्तों की वजह से हुई थी बाघिन की मौत कान्हा में बाघिन और शावकों की मौत का खुलासा

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जबलपुर। मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन T-141 और उसके चार शावकों की मौत का कारण आखिरकार सामने आ गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि इन बाघों की मौत ‘केनाइन डिस्टेंपर वायरस’ (CDV) नामक खतरनाक संक्रमण से हुई। यह वायरस आमतौर पर संक्रमित कुत्तों से फैलता है और अब जंगल के शीर्ष शिकारी तक पहुंच जाने से वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों में चिंता बढ़ गई है।
कान्हा के फील्ड डायरेक्टर रविंद्र मणि त्रिपाठी के अनुसार मृत बाघों के सैंपल जांच के लिए जबलपुर वेटरिनरी साइंस कॉलेज भेजे गए थे, जहां CDV संक्रमण की पुष्टि हुई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शावकों के पेट खाली पाए गए, जिससे संकेत मिला कि वायरस के कारण उनकी भूख खत्म हो गई थी और वे लंबे समय तक कमजोर अवस्था में रहे। यह संक्रमण निमोनिया जैसी गंभीर स्थिति भी पैदा करता है।
वन विभाग का अनुमान है कि आसपास के गांवों के संक्रमित कुत्तों के जरिए यह वायरस जंगल तक पहुंचा। विशेषज्ञों के मुताबिक जंगल में अवैध गतिविधियों के दौरान लोग अपने साथ कुत्ते लेकर जाते हैं, जिससे संक्रमण वन्यजीवों तक फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
यह पहली बार नहीं है जब CDV ने बड़े वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाया हो। वर्ष 2018 में गिर नेशनल पार्क में इसी वायरस के कारण 34 शेरों की मौत हुई थी, जिसके बाद यह बीमारी वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी चुनौती मानी जाने लगी।
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे ने घटना के लिए निचले स्तर की मॉनिटरिंग और पेट्रोलिंग व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जंगल में बाहरी लोगों और कुत्तों की आवाजाही पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रखा गया, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ी।
वायरस की पुष्टि के बाद कान्हा प्रबंधन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। आसपास के आठ गांवों में कुत्तों और मवेशियों का टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। अब तक 103 कुत्तों की पहचान कर उनमें से 94 का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। जिस क्षेत्र में बाघों के शव मिले, वहां पांच किलोमीटर के दायरे को डिसइन्फेक्ट किया गया है और 40 ट्रैप कैमरों तथा हाथी दलों की मदद से लगातार निगरानी रखी जा रही है।
पर्यटकों के लिए भी नए सुरक्षा नियम लागू किए गए हैं। रिजॉर्ट और होटल संचालकों को विशेष गाइडलाइन जारी की गई है, जबकि कान्हा के प्रवेश द्वारों पर डिसइन्फेक्टेंट टैंक बनाए गए हैं ताकि सभी वाहन संक्रमण नियंत्रण प्रक्रिया से गुजरकर ही जंगल में प्रवेश

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