November 7, 2026
सी टाइम्स
सी टाइम्सsampadkiya

शाह स्वच्छ छवि वाली सरकार भी नहीं दे पाए

jabalpur latest news today

रैपर से राजनेता बने बालेंद्र शाह ने अपने चंद दिनों के शासनकाल में नेपाल को अशांत कर दिया है। पूर्व सरकारों के खिलाफ भड़के असंतोष के कारण उल्का की तरह उगे शाह स्वच्छ छवि वाली सरकार भी नहीं दे पाए हैं।
बालेंद्र शाह को नेपाल का प्रधानमंत्री बने, अभी एक महीना नहीं हुआ है। लेकिन इसी बीच उनकी सरकार ने अलग- अलग जन समूहों में विरोध भड़का दिया है। वित्तीय गड़बड़ी के इल्जाम के कारण गृह मंत्री सुधन गुरुंग को इस्तीफा देना पड़ा। गुरुंग पिछले सितंबर में हुए हुए कथित जेन-जेड विद्रोह के प्रमुख संचालकों में थे। उनकी इसी भूमिका के कारण तजुर्बा ना होने के बावजूद उन्हें गृह मंत्रालय जैसा महत्त्वपूर्ण मंत्रालय मिला। मगर सिर्फ 26 दिन बाद उन्हें पद छोडऩा पड़ा। 27 मार्च को शपथ ग्रहण के बाद शाह सरकार से हटने वाले वे दूसरे मंत्री हैं। इसके पहले श्रम मंत्री दीपक शाह को भी वित्तीय गड़बड़ी के इल्जाम के कारण ही पद छोडऩा पड़ा था।
इस बीच शाह सरकार के कई फैसलों से नेपाल की सड़कों पर विरोध प्रदर्शनों की कड़ी लग गई है। शाह ने अपने आरंभिक कदमों में सियासी पार्टियों से जुड़े छात्र संघों को भंग कर दिया। इससे छात्र नाराज हो गए। फिर फैसला लिया कि भारत से 100 नेपाली रुपये से अधिक का सामान लाने पर सीमा शुल्क चुकाना होगा। इससे भारतीय सीमा से जुड़े मधेस इलाके में विरोध भड़क उठा। शाह ने जो कदम सबसे पहले उठाया, वह पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी था। मगर सरकार उनके खिलाफ साक्ष्य पेश नहीं कर पाई, जिस कारण कोर्ट ने दोनों को रिहा कर दिया।
इससे ओली समर्थकों को सड़कों पर उतरने का मौका मिला। फिर शाह ने सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों, मंत्रियों, राष्ट्रपतियों और यहां तक कि पूर्व राजा की संपत्ति की जांच कराने का फैसला भी किया है। इससे आरोप लगा है कि बुनियादी समस्याओं का हल तलाशने के बजाय शाह बदले की भावना से काम कर रहे हैं। तो कुल मिला कर रैपर से राजनेता बने शाह ने अपने चंद दिनों के शासनकाल में नेपाल को अशांत एवं अस्थिर कर रखा है। पूर्व सरकारों की अकुशलता, कथित भ्रष्टाचार, और भाई-भतीजावाद से भड़के असंतोष के कारण उल्का की तरह उगे शाह स्वच्छ छवि वाली सरकार भी नहीं दे पाए। नतीजा, तेजी से उनकी चमक का उड़ जाना है।

 

अन्य ख़बरें

डिग्री हाथ में, जिम्मेदारियाँ कंधों पर और अवसरों का इंतजार: जबलपुर के युवाओं की बीतती उम्र का हिसाब कौन देगा?

Newsdesk

त्योहार के समय भी जबलपुर की सड़कों पर कचरा और मवेशियों के झुंड, गंदगी में भोजन तलाश रही गायें

Newsdesk

सड़क बनी, नल टूटा और बहता रहा पानी: चौथपुल-भैंसासुर रोड पर निर्माण की गुणवत्ता सवालों में

Newsdesk

Leave a Comment