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June 13, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

संघर्ष से सफलता तक: व्हीलचेयर पर बैठकर रचा इतिहास, सिवनी के विजय बघेल बने सहकारिता निरीक्षक


सिवनी – कहते हैं कि यदि इरादे मजबूत हों तो परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मंज़िल तक पहुंचने से नहीं रोक सकतीं। इस कहावत को सच कर दिखाया है सिवनी जिले के छोटे से गांव छुहाई (Chhuai) के निवासी श्री विजय बघेल ने, जिनका चयन मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) 2023 के माध्यम से सहकारिता निरीक्षक (Cooperative Inspector) पद पर हुआ है।

32 वर्षीय विजय बघेल, श्री राज्जन सिंह बघेल के पुत्र हैं। बचपन में वे एक सामान्य एवं मेधावी विद्यार्थी थे, लेकिन कक्षा तीसरी के बाद एक गंभीर बीमारी ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। धीरे-धीरे उनके शरीर में अनेक शारीरिक दिव्यांगताएँ विकसित होने लगीं। यह वह दौर था जब अधिकांश लोग अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं, लेकिन विजय ने हार मानने के बजाय संघर्ष को ही अपनी ताकत बना लिया।

बीमारी और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कक्षा पाँचवीं में नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की और जवाहर नवोदय विद्यालय, कान्हीवाड़ा (सिवनी) में प्रवेश प्राप्त किया। यह उनकी असाधारण प्रतिभा और दृढ़ संकल्प का पहला बड़ा प्रमाण था।

समय के साथ उनकी शारीरिक स्थिति और कठिन होती गई। कक्षा दसवीं तक आते-आते उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा। लेकिन व्हीलचेयर उनकी गति को रोक नहीं सकी। उन्होंने नवोदय विद्यालय से दसवीं की शिक्षा पूर्ण करने के बाद ग्राम जीरावारा से उच्च माध्यमिक एवं स्नातक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ, आने-जाने की कठिनाइयाँ, संसाधनों की कमी और सामाजिक चुनौतियाँ लगातार उनके सामने खड़ी रहीं, लेकिन उन्होंने हर बाधा को अपने हौसले के आगे छोटा साबित कर दिया।

विजय की सफलता के पीछे उनके परिवार का अटूट विश्वास और उनका स्वयं का अथक परिश्रम रहा। उन्होंने अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी स्व-अध्ययन (Self Study) के माध्यम से की। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा। इंटरव्यू की तैयारी के लिए उन्होंने कुछ संस्थानों से मार्गदर्शन लिया, लेकिन उनकी असली ताकत उनकी निरंतर मेहनत, अनुशासन और कभी हार न मानने वाली सोच रही।

आज उनका चयन केवल एक सरकारी पद प्राप्त करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो किसी न किसी कठिनाई, अभाव या असफलता से जूझ रहे हैं। विजय ने साबित कर दिया कि सफलता शरीर की ताकत से नहीं, बल्कि मन की दृढ़ता और निरंतर प्रयासों से हासिल होती है।

अपनी सफलता का श्रेय परिवार, शिक्षकों और शुभचिंतकों को देते हुए विजय कहते हैं—

“बस लगातार प्रयास करते रहिए, हार मत मानिए। यदि आप ईमानदारी से कोशिश करते रहेंगे तो एक दिन सफलता निश्चित रूप से आपके कदम चूमेगी।”

विजय बघेल की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पूरे सिवनी जिले और मध्य प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन संदेश देता है कि परिस्थितियाँ कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, आत्मविश्वास अडिग हो और प्रयास निरंतर हों, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।

विजय बघेल वास्तव में इस बात के जीवंत उदाहरण हैं कि “संघर्ष जितना बड़ा होता है, सफलता उतनी ही शानदार होती है।”

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