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June 6, 2026
सी टाइम्स
अंतरराष्ट्रीय

भारत-रूस सैन्य सहयोग आपसी विश्वास पर आधारित, सुखोई-57 लड़ाकू विमान का भी प्रस्ताव: पुतिन



सेंट पीटर्सबर्ग, 5 जून। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को कहा कि भारत और रूस के बीच सैन्य सहयोग आपसी विश्वास पर आधारित है और दोनों देशों की साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि संयुक्त विकास परियोजनाओं तक फैली हुई है।


सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच के एक पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से मजबूत और भरोसेमंद सहयोग रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत ने रूस से कई लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर खरीदे हैं। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि रूस ने अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमान सुखोई-57 का प्रस्ताव भी भारत को दिया है।



पुतिन ने कहा, “सुखोई-57 दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक है और इसे भारत को भी प्रस्तावित किया गया है।”



रूसी राष्ट्रपति ने भारत-रूस रक्षा सहयोग के सफल उदाहरण के रूप में ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह भारतीय और रूसी विशेषज्ञों के बीच सफल तकनीकी साझेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।



अपने संबोधन में पुतिन ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत उन देशों में शामिल है जो किसी बाहरी दबाव या निर्देश के आधार पर निर्णय नहीं लेते।



उन्होंने कहा, “भारत ने कभी भी विदेशों से मिलने वाले निर्देशों का पालन नहीं किया है। संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय लेने के अधिकार को चुनौती नहीं दी जा सकती।”



पुतिन ने एक दिन पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किसी भी प्रकार का दबाव बनाने की कोशिशों की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि भारत जैसे विशाल और प्रभावशाली देश के प्रधानमंत्री पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय रिश्तों के लिए नुकसानदायक है।



रूसी राष्ट्रपति ने भारत की प्रतिभा, शिक्षा व्यवस्था और तकनीकी क्षमता की भी जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक बेहद प्रतिभाशाली, शिक्षित और कुशल हैं तथा विशेष रूप से कोडिंग और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उन्होंने वैश्विक पहचान बनाई है।



पुतिन ने कहा, “भारत और रूस के बीच हर मायने में बहुत अच्छे, भरोसेमंद और भाईचारे वाले संबंध हैं। हम जानते हैं कि भारतीय लोग कितने प्रतिभाशाली हैं। उनकी शिक्षा और तकनीकी दक्षता विश्वभर में सम्मानित है।”



उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और भविष्य में भी विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की व्यापक संभावनाएं हैं।

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