34.4 C
Jabalpur
June 5, 2026
सी टाइम्स
जीवनशैली

सिर्फ खानपान नहीं, वैश्विक पहचान भी; ‘जीआई’ टैग ने बदली भारतीय उत्पादों की तस्वीर

नई दिल्ली, 22 मई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली, संयुक्त अरब अमीरात समेत अन्य देशों की यात्रा सिर्फ कूटनीति और आर्थिक समझौतों तक सीमित नहीं रही। इस यात्रा ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्पकला और अनोखे कृषि उत्पादों को वैश्विक मंच पर भी पहचान दिलाई। उन्होंने विदेश के नेताओं को भारत से ले गए असम का ‘मूगा रेशम शॉल’, गुजरात की ‘रोगन पेंटिंग’, बिहार की ‘मिथिला पेंटिंग’ जैसे खास तोहफे भेंट किए। देश के ये सभी उत्पाद अपने-अपने शहर की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने हर देश के राष्ट्राध्यक्षों और प्रमुखों को जीआई टैग (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) प्राप्त भारतीय उत्पाद भेंट किए, जो ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना के तहत स्थानीय कारीगरों और किसानों की मेहनत का प्रतीक हैं। यह यात्रा भारत को विश्व पटल पर सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनाने का एक और उदाहरण साबित हुई। आगरा की पच्चीकारी, मूगा रेशम, बिहार की मधुबनी पेंटिंग, ब्लू पॉटरी, रोगन आर्ट, कोफ्तगरी कटार, केसर आम, मेघालय अनानास और मिथिला मखाना जैसे उत्पादों ने विदेशी नेताओं का ध्यान खींचा। भारत में 600 से अधिक उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त है। इनमें कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प, खाद्य पदार्थ और हस्तकला शामिल हैं। पीएम मोदी ने आगरा की पच्चीकारी से सजी संगमरमर पेटी, मूगा रेशम (गोल्डन सिल्क) और शिरुई लिली रेशम का शॉल इटली की प्रधानमंत्री को भेंट की। वहीं, नीदरलैंड में जयपुर की ब्लू पॉटरी, मीनाकारी-कुंदन की बालियां और मिथिला पेंटिंग। यूएई में रोगन पेंटिंग (जीवन वृक्ष) और कोफ्तगरी कटार के साथ मिथिला मखाना भेंट किए। दरअसल, भारत की असली ताकत उसकी विविधता में छिपी है। कहीं कश्मीर का केसर है, कहीं बिहार का मखाना, कहीं बनारस की साड़ी तो कहीं कच्छ की रोगन कला। ये उत्पाद केवल वस्तुएं नहीं, बल्कि भारत की मिट्टी, मेहनत और परंपरा की कभी न मिटने वाली पहचान हैं। वास्तव में जीआई टैग भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुकी हैं। जीआई टैग यानी भौगोलिक संकेतक किसी उत्पाद को उसके भौगोलिक मूल स्थान की पहचान देता है। यह कानूनी संरक्षण है, जो सुनिश्चित करता है कि उस उत्पाद का नाम केवल उसी क्षेत्र के असली उत्पादक ही इस्तेमाल कर सकें। जीआई टैग से किसानों, स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ाता है, नकली उत्पादों से बचाता है, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है। ये जीआई टैग भारत की विविधता को पेश करते हैं। उत्तर प्रदेश के जीआई टैग उत्पाद केवल खाने-पीने की चीजें नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और स्थानीय कारीगरी की पहचान भी हैं। मलिहाबाद का दशहरी आम, वाराणसी का लंगड़ा आम, बनारसी पान, प्रयागराज का मशहूर अमरूद अपने खास स्वाद के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं। वहीं, महोबा का देशावरी पान, मुजफ्फरनगर का गुड़, हाथरस की हींग और प्रतापगढ़ का आंवला, लखनवी चिकनकारी, कानपुर चमड़ा, आगरा पच्चीकारी, लखनऊ जूते, मथुरा पेड़ा और आजमगढ़ कालीन अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और अलग पहचान की वजह से लोगों की पसंद बने हुए हैं। बिहार के पारंपरिक खान-पान और कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण चीजों को जीआई टैग दिया गया है। नालंदा जिले का प्रसिद्ध सिलाव खाजा, जो 52 परतों वाली खस्ता मिठाई है। इसके अलावा, मुजफ्फरपुर की शाही लीची, मिथिला क्षेत्र का पौष्टिक मिथिला मखाना, मगध क्षेत्र का सुगंधित मगही पान, भागलपुर का स्वादिष्ट जरदालू आम, भागलपुर का सुगंधित कतरनी चावल और पश्चिम चंपारण का छोटे दाने वाला सुगंधित मार्चा चावल भी है। इसके अलावा, कर्नाटक का मैसूर सिल्क, कोर्ग कॉफी, ब्याडगी मिर्च, नंजनगुड केला, उडुपी मट्टू गुल्ला बैंगन, मैसूर पान, देवनाहल्ली पोमेलो, धारवाड़ पेड़ा, नवलगुंड दरी, इल्कल साड़ी। तो केरल का पलक्कड़ मट्टा चावल, पोक्काली चावल, वायनाड जीरकसल चावल, कूर्ग संतरा, वजहकुलम अनानास, मरयूर गुड़, तिरूर सुपारी, नीलांबुर सागौन, एथोमोझी नारियल शामिल है। तमिलनाडु के जीआई टैग उत्पादों में कांचीपुरम सिल्क, मदुरै मल्लि, इरोड हल्दी, कोडाइकनाल मलाई पूंडू, पलनी पंचमीर्थम, श्रीविल्लीपुत्तूर पल्कोवा, कोविलपट्टी कदलाई मितई, नीलगिरि चाय, विरुपाक्षी पहाड़ी केला, तंजावुर पेंटिंग के साथ आंध्र प्रदेश का तिरुपति लड्डू, गंंटूर मिर्च, बंगनपल्ले आम, कोंडापल्ली खिलौने शामिल हैं। तेलंगाना का हैदराबादी हलीम, पोचमपल्ली इकत, नरायणपेट साड़ी, वारंगल दरी, चेरियल स्क्रॉल पेंटिंग, तेलंगाना इमली, निजामाबाद ब्लैक पॉटरी भी शामिल हैं। झारखंड के जीआई टैग उत्पादों पर नजर डालें तो सोहराय और कोहबर पेंटिंग, जर्दालू आम, डोकरा कला, तसर सिल्क, आदिवासी बांस कला, कोदो मिलेट उत्पाद हैं। जीआई टैग उत्पादों में असम का मूगा सिल्क, जोहा चावल, तेजपुर लीची, गुजरात का कच्छ रोगन आर्ट, पटोला साड़ी, सुरती पान, केसर आम के साथ राजस्थान का ब्लू पॉटरी, कोफ्तगरी, बांडेज, झालावाड़ आम व जम्मू-कश्मीर का केसर, पश्मीना शॉल, बासमती चावल, पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग चाय, शांतिनिकेतन चादर, बंगाल रसगुल्ला भी शामिल है। वहीं, महाराष्ट्र का अल्फांसो आम, कोल्हापुरी चप्पल, पावन खंडी गुड़ के साथ ओडिशा का कांजीवरण सिल्क, रसगोला, ओडिशा पान भी शामिल है।

अन्य ख़बरें

पीएम मोदी का ‘सुभाषितम’ संदेश: योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें

Newsdesk

बुढ़ापे में स्वस्थ रहने के लिए योग : तन-मन की गर्मी पर शीतली प्राणायाम से लगाएं ब्रेक

Newsdesk

नौतपा की भीषण गर्मी में गलत डाइट से बढ़ सकता है हीट स्ट्रोक का खतरा, जानें कैसा होना चाहिए खानपान

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading