नई दिल्ली, 13 जून दक्षिण अफ्रीकी रिजर्व बैंक के गवर्नर लेसेत्जा कन्यागो ने भारत की रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को एक आदर्श मॉडल बताया है। यह जानकारी दक्षिण अफ्रीका के आईओएल की रिपोर्ट में दी गई है।
एक नई रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका नकदी के इस्तेमाल को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस प्रक्रिया में यूपीआई को एक सफल उदाहरण के रूप में देख रहा है। हालांकि, इसके लिए दक्षिण अफ्रीका के सामने कई चुनौतियां भी हैं।
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि कई देश कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में दक्षिण अफ्रीका से काफी आगे हैं। उन्होंने भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) प्रणाली का उदाहरण देते हुए इसे एक ऐसा त्वरित और कम लागत वाला भुगतान माध्यम बताया, जो महंगे पॉइंट-ऑफ-सेल (पीओएस) टर्मिनल की बजाय मोबाइल नंबर या क्यूआर कोड जैसे सरल साधनों के जरिए भुगतान की सुविधा प्रदान करता है।
दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने माना कि भारत और दूसरे देश अलग-अलग सिस्टम बनाने के बजाय ऐसी तकनीक की तरफ बढ़ गए हैं जिनका इस्तेमाल कई सरकारी विभाग कई तरह की सेवा देने के लिए कर सकते हैं।
यूपीआई भारत के पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ बन गया है, जो दुनिया के लगभग आधे रियल-टाइम ट्रांजैक्शन को प्रबंधित करता है।
दक्षिण अफ्रीका की सरकार एक फ्री, रियल-टाइम नेशनल पेमेंट सिस्टम पर काम कर रही है ताकि डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म के जरिए कैश ट्रांजैक्शन कम किए जा सकें। इसका इस्तेमाल दक्षिण अफ्रीका के लोग मुफ्त में कर सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, “प्रस्ताव दक्षिण अफ्रीका को विकासशील अर्थव्यवस्था वाले देशों के बराबर रखना चाहता है, जो तेजी से कैशलेस ट्रांजैक्शन की ओर बढ़ रहे हैं।”
देश में प्रीपेड कार्ड और डिजिटल वॉलेट मार्केट के 2024 में 11.8 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2029 तक 21.2 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है।
हालांकि, कैशलेस ट्रांजैक्शन को लेकर दक्षिण अफ्रीका के सामने कई चुनौतियां हैं। यहां पर 43 फीसदी वयस्कों के पास बैंकिंग सुविधाएं नहीं हैं। इसके अलावा, गांवों में इंटरनेट की पहुंच 70 फीसदी से कम है और प्रति व्यक्ति इनकम के मुकाबले मोबाइल डेटा की ज्यादा लागत है।
इसके अलावा, 2024 में ही दक्षिण अफ्रीका में 12,000 मेगावाट से अधिक की अनियोजित बिजली कटौती दर्ज की गई, जिससे डिजिटल प्रणालियों की विश्वसनीयता को लेकर चिंताएं और संदेह पैदा हुए।
गवर्नर ने रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि नकदी पर अधिक निर्भरता के कारण महिलाओं के लिए परिवार की वित्तीय जरूरतों, खासकर बच्चों के लिए मिलने वाली सहायता राशि का प्रबंधन करना अधिक कठिन हो जाता है। समाज के लिए नकदी पर अत्यधिक निर्भर रहना आदर्श स्थिति नहीं है।
दक्षिण-अफ्रीकी मीडिया हाउस ने कहा, “भारत का यूपीआई एक डिजिटल प्लेटफॉर्म की सफलता की कहानी है। यूपीआई, विश्व स्तर पर पहचाना जाने वाला वित्तीय तकनीक का कमाल है, जिसने ज्यादातर कैश से चलने वाली अर्थव्यवस्था को दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में बदल दिया है।”
रिपोर्ट में बताया गया है कि एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) की साझेदारी के जरिए भारत का यूपीआई सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, मॉरिशस और फ्रांस तक पहुंच गया है।
इसमें आगे कहा गया, “नेपाल और भूटान ने पहले ही ट्रांसफर के लिए यूपीआई को अपना लिया है और एशिया, अफ्रीका और यूरोप के सेंट्रल बैंकों और फिनटेक के साथ बातचीत चल रही है।


