सी टाइम्स न्यूज बालाघाट बालाघाट जिले के वारासिवनी तहसील अंतर्गत भांडी पंचायत में लगा केरा के जंगलों में एक बड़ा विशाल मलय रिसॉर्ट के साथ मलय वाटर पार्क खोला गया है । यह पार्क कम ओर लूट मार का अड्डा अब ज्यादा बन गया है । जिले में यह पार्क अब दारू जुआ हुक्का बार ओर मस्ती गलत अवैध गतिविधियों के ज्यादा पहचाना जा रहा है । लेकिन जिला प्रशासन ओर पुलिस को इसकी जांच करने की आज तक फुर्सत भी नहीं मिली है ।
गेट एंट्री के नाम पर बड़ी की लूट
पार्क में आने वाले पर्यटकों से मनमाने ढंग से टिकट वसूला जा रहा है। नियम के मुताबिक 5 वर्ष से ऊपर के बच्चों के लिए अलग टिकट होना चाहिए, लेकिन यहां बड़े-बच्चे सबके लिए एक समान दर वसूली जा रही है। इससे स्पष्ट है कि संचालक जनता को खुलेआम लूट रहे हैं।
पेयजल की नहीं व्यवस्था
एक और हैरान करने वाली बात पार्क में आने वाले सैकड़ों लोगों के लिए पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि किसी भी सार्वजनिक स्थान पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना बुनियादी जिम्मेदारी होती है, यहां न तो पानी के कूलर हैं, न कोई फिल्टर प्लांट। लोग प्यासे ही लौट रहे हैं, जबकि अंदर पानी की बर्बादी मची हुई है।
रिसॉर्ट बन गया जुआ और गलत कार्यों का अड्डा.?
सबसे गंभीर आरोप पार्क के अंदर बने रिसॉर्ट को लेकर है। विशेष सूत्रों के अनुसार यहां जुआ गांजा हुक्का बार आदिविशेह रूप से चलाया जा रहे हैं और बड़ी राशि लेकर युवतियों को परोसा जा रहा है। रात के अंधेरे में यह जगह जिले के युवाओं को बर्बाद करने का केंद्र बन गई है।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि यह पर रूम बुकिंग के नाम पर बालाघाट जिले सहित आसपास भंडारा तुमसर गोंदिया ओर सिवनी जिले से बड़े बड़े पैसे वाले खासकर युवा दारू हुक्का बार गांजा ओर जुवा खेलने यहां आते है और रंगीनियां मनाते है । यहां जुआ के साथ ओर भी अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। जिला प्रशासन क्या कर रहा । आज तक न कोई जांच न कोई टैक्स न कोई ठोस नीति इस रिसॉर्ट के लिए बनाई गई ।
यह स्थिति जिले के नैतिक वातावरण को विषाक्त कर रही है। स्कूली बच्चे, परिवार और पर्यटक इस जगह पर आ रहे हैं, लेकिन अंदर चल रहे गंदे धंधों की खबर फैलने से पूरे क्षेत्र की छवि धूमिल हो रही है। क्या पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक भी नहीं है? या फिर कोई बड़ा हाथ ऊपर से संरक्षण दे रहा है?
जल संकट बनाम बर्बादी दोहरी नीति
जिले में पानी की भारी किल्लत है। नदियां, तालाब सूख चुके हैं। किसान रबी फसल लगाने से वंचित हैं, उनकी फसलें जल संकट की भेंट चढ़ रही हैं। प्रशासन ने सख्ती दिखाई – “पानी बचाओ” का नारा दिया, लेकिन मलय वाटर फॉल पर कोई रोक नहीं। लाखों लीटर पानी प्रतिदिन बर्बाद हो रहा है। अगर यही पानी किसानों के खेतों में पहुंचाया जाए तो सैकड़ों हेक्टेयर भूमि हरी-भरी हो सकती है। लेकिन जिम्मेदारों को न किसानों की चिंता है, न जनता की। संचालक के हौसले इतने बुलंद हैं कि कोई शिकायत, कोई जांच, कोई कार्रवाई नहीं। ग्राम पंचायत, ब्लॉक, जिला प्रशासन – सब चुप। क्या यह भ्रष्टाचार का हिस्सा है? या फिर बड़े लोगों के संरक्षण में चल रहा धंधा


