जबलपुर। कभी महाकौशल ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय आज गंभीर शैक्षणिक संकट से गुजर रहा है। विश्वविद्यालय के शिक्षण विभाग में स्वीकृत 156 शिक्षकीय पदों में से 138 पद लंबे समय से रिक्त हैं। वर्तमान में केवल 18 नियमित शिक्षक ही कार्यरत हैं, जिससे शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
स्थिति आने वाले समय में और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। जुलाई 2026 में एक तथा दिसंबर 2026 में एक प्राध्यापक सेवानिवृत्त होंगे, जबकि वर्ष 2027 में चार और प्राध्यापक सेवा से निवृत्त हो जाएंगे। ऐसे में नियमित शिक्षकों की संख्या और घट जाएगी।
विश्वविद्यालय के कई प्रमुख विभाग—रसायन शास्त्र, कंप्यूटर साइंस, हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, इतिहास, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और दर्शनशास्त्र—लंबे समय से नियमित शिक्षकों के अभाव से जूझ रहे हैं। वहीं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में भी नियमित संकाय उपलब्ध नहीं है। कृषि विज्ञान जैसे कुछ विषयों में आधारभूत सुविधाओं की कमी के बावजूद पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि एक समय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ अकादमिक सहयोग, शोध और छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान की समृद्ध परंपरा थी, लेकिन नियमित शिक्षकों की कमी के कारण ऐसी गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं।
विश्वविद्यालय के पुस्तकालयों में वर्षों से नई पुस्तकों और शोध संसाधनों का पर्याप्त विस्तार नहीं हुआ है। आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी और कंप्यूटर आधारित सुविधाओं के विकास की गति भी धीमी बताई जा रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक स्तर और शोध वातावरण को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां नहीं हुईं और आधारभूत शैक्षणिक संसाधनों को मजबूत नहीं किया गया, तो विश्वविद्यालय की गुणवत्ता और साख पर इसका दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।


