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स्वच्छता के लिए वरदान साबित हो रहा है कठौंदा का वेस्ट टू एनर्जी प्लांट प्रतिदिन 500 से 800 टन कचरे का निष्पादन कर 11.5 मेगा वॉट बिजली का हो रहा है उत्पादन*निगमायुक्त ने प्लांट संचालन व्यवस्था की समीक्षा कर अमले को दिए आवश्यक दिशा निर्देश*
जबलपुर। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू एवं निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार के मार्गदर्शन में स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार ऊंचाइयों को छू रहे संस्कारधानी जबलपुर के लिए कठौंदा स्थित वेस्ट टू एनर्जी प्लांट एक बड़ा वरदान साबित हो रहा है। यह प्लांट न केवल शहर को कचरे के ढेर से मुक्ति दिला रहा है, बल्कि कचरे से कंचन बिजली बनाने के मंत्र को भी साकार कर रहा है। वर्तमान में इस प्लांट के माध्यम से प्रतिदिन 500 से 800 टन कचरे का सुरक्षित निष्पादन किया जा रहा है, जिससे 11.5 मेगावाट ग्रीन एनर्जी बिजली का उत्पादन हो रहा है।
निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने प्लांट की संचालन व्यवस्था की आज विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने प्लांट की कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए संबंधित अमले और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
*प्लांट की मुख्य विशेषताएं और सफलताएं*
शहर से निकलने वाले सैकड़ों टन कचरे को खुले में डंप करने के बजाय शत-प्रतिशत वैज्ञानिक निष्पादन अत्याधुनिक तकनीक से प्रोसेस किया जा रहा है। इससे आस-पास के पर्यावरण और भूमिगत जल को दूषित होने से बचाया जा रहा है। प्लांट से उत्पादित 11.5 मेगावाट बिजली को ग्रिड में सप्लाई किया जा रहा है, जिससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम हो रही है और कार्बन फुटप्रिंट में कमी आ रही है।
*निगमायुक्त ने दिए व्यवस्थाएं और बेहतर करने के निर्देश*
समीक्षा बैठक के दौरान निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कचरा कलेक्शन से लेकर प्लांट में उसकी प्रोसेसिंग तक की पूरी चेन को और अधिक स्मूथ बनाया जाए। कठौंदा प्लांट हमारे शहर की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का दिल है। इसकी कार्यक्षमता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आनी चाहिए। गीले और सूखे कचरे का बेहतर पृथक्कीकरण सुनिश्चित किया जाए ताकि बिजली उत्पादन की दक्षता और बढ़ सके। उन्होंने बारिश के मौसम को देखते हुए प्लांट में कचरे के रख-रखाव और सुचारू संचालन के लिए विशेष एहतियात बरतने के भी निर्देश दिए हैं ताकि बिजली उत्पादन की निरंतरता बनी रहे।
*पर्यावरण और शहर के नागरिकों को मिल रहे ये फायदे*
भारी मात्रा में कचरे का तुरंत निष्पादन होने से डंपिंग साइट पर कचरे के पहाड़ नहीं बन रहे हैं, जिससे आस-पास के इलाकों में दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का खतरा खत्म हो गया है।


