जबलपुर। नगर निगम भले ही शहर को स्वच्छ बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। शहर के कई इलाकों में गंदगी, अधूरी नाला सफाई, खाली प्लॉटों में कचरे के ढेर और आवारा पशुओं द्वारा कचरा खाने जैसी तस्वीरें स्वच्छता अभियान की पोल खोल रही हैं।
मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में त्योहारों के दौरान भी पर्याप्त सफाई व्यवस्था नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं। कई बड़े नालों की सफाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, जिससे जल निकासी और स्वच्छता दोनों प्रभावित हो रही हैं।
अनवरगंज मोहल्ले में नगर निगम के कर्मचारी स्वयं कचरा डंप करते दिखाई दिए, जबकि वहीं बकरियां और अन्य आवारा पशु कचरे का सेवन करते नजर आए। यह स्थिति न केवल स्वच्छता बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय है।
घमापुर के जंगीरा पुल के पास बड़े नाले की अधूरी और दिखावटी सफाई स्थानीय लोगों में नाराजगी का कारण बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर, जहां सौंदर्यीकरण के तहत हैंगिंग गमले लगाए गए थे, उनकी देखभाल के अभाव में अधिकांश पौधे सूख चुके हैं। कई स्थानों पर गमलों के ठीक सामने डस्टबिन रख दिए गए हैं, जिससे सौंदर्यीकरण का उद्देश्य भी प्रभावित हो रहा है।
घमापुर और ब्यौहरबाग स्थित पेट्रोल पंप के पास सहित कई इलाकों में खाली प्लॉट कचरा घर में तब्दील हो चुके हैं। जिन भूखंड मालिकों का निवास शहर से बाहर है, उनके प्लॉटों में लगातार कचरा फेंका जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डस्टबिन केवल दिखावे के लिए लगाए गए हैं और नियमित सफाई व निगरानी का अभाव है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्वच्छता पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे। लोगों ने नगर निगम से नियमित सफाई, खाली प्लॉटों में कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई तथा नालों की प्रभावी सफाई सुनिश्चित करने की मांग की है।


