प्रहलाद गुप्ता कोतमा -कोयलांचल क्षेत्र प्रतिभाओं से भरा हुआ है, जरूरत केवल उन्हें उचित मंच और अवसर मिलने की है। विश्व संगीत दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत बदरा निवासी लोकगायक सचिन तिवारी से बातचीत की गई। 1 जनवरी 1992 को साधारण परिवार में जन्मे सचिन तिवारी ने संगीत जगत में एक अलग पहचान बना ली है। वे बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें संगीत का शौक था, लेकिन छोटे गांव में रहने और पारिवारिक संगीत पृष्ठभूमि न होने के कारण उन्हें बड़ा मंच नहीं मिल सका।इंजीनियरिंग के बाद सूरत में नौकरी की, लेकिन अपने सपनों को साकार करने के लिए उन्होंने स्वयं का म्यूजिकल ग्रुप शुरू किया। आज वे मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड सहित देश के कई राज्यों में लगभग 1000 से अधिक मंचीय प्रस्तुतियां दे चुके हैं। वे छत्तीसगढ़ शासन के विभिन्न आयोजनों और राज्योत्सव कार्यक्रमों में भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। संगीत के क्षेत्र में पिछले 14 वर्षों से सक्रिय सचिन तिवारी कई हिंदी, छत्तीसगढ़ी और लोकगीत एल्बमों में अपनी आवाज दे चुके हैं। उन्हें वर्ष 2008 में छत्तीसगढ़ आइडल का खिताब प्राप्त हुआ था। इसके अलावा 72 घंटे की नॉनस्टॉप म्यूजिक मैराथन में भाग लेने पर उन्हें लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से सम्मानित किया गया था। सचिन तिवारी ने देश के कई नामी कलाकारों के साथ मंच साझा किया है और उनकी लोकप्रियता विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में देखने को मिलती है। वर्तमान में भी वे नए भजन, लोकगीत और म्यूजिकल एल्बमों पर कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि प्रतिभाओं को सही अवसर और मंच मिले तो छोटे गांवों से भी बड़े कलाकार निकल सकते हैं।


