जबलपुर।
प्रोजेक्ट फ्लैशलाइट्स एवं रंगाभरण थिएटर के संयुक्त तत्वावधान में 20 जून की शाम बस्ती के बच्चों द्वारा तैयार और प्रस्तुत बाल नाटक ‘खुल जा सिम-सिम’ का मंचन अत्यंत उत्साह, ऊर्जा और भावनात्मक प्रभाव के साथ सम्पन्न हुआ। इस प्रस्तुति की सबसे विशेष बात यह रही कि इसे बस्ती के बच्चों ने स्वयं मंच पर जीवंत किया और अपनी सहजता, मासूमियत व जीवंत अभिनय से दर्शकों का मन जीत लिया।
लोकप्रिय कथा ‘अली बाबा और चालीस चोर’ से प्रेरित इस नाटक को बच्चों की दुनिया, उनके सपनों और शिक्षा के महत्व के साथ एक नए रूप में प्रस्तुत किया गया। नाटक में गुफा का खजाना सोना-चाँदी नहीं, बल्कि बच्चों की खुशियाँ — उनकी किताबें, खिलौने, पतंगें, खेल और सपने थे, जिन्हें चोर छीन लेते हैं। बच्चों के साहस, दोस्ती और बुद्धिमत्ता के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सबसे बड़ा खजाना धन नहीं, शिक्षा है।
प्रस्तुति में बच्चों ने अभिनय, गीत, नृत्य और सामूहिक दृश्यों के माध्यम से न केवल मनोरंजन किया, बल्कि शिक्षा, साझेदारी, संवेदनशीलता और अच्छे इंसान बनने का सशक्त संदेश भी दिया। बच्चों की सामूहिक ऊर्जा ने नाटक को अत्यंत प्रभावशाली बनाया।
इस प्रस्तुति की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि यह नाटक बस्ती के बच्चों के साथ तैयार किया गया, और इसका विषय उनके जीवन, संघर्ष, सपनों और भविष्य से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि बच्चों और उनके अभिभावकों तक यह संदेश पहुँचाने का प्रयास था कि पढ़ाई, सपने और शिक्षा ही जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।
निर्देशक अक्षय सिंह ठाकुर ने कहा कि रंगमंच बच्चों को केवल अभिनय नहीं सिखाता, बल्कि आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति, संवेदनशीलता, अनुशासन और सामूहिकता भी सिखाता है। उन्होंने कहा कि ‘खुल जा सिम-सिम’ जैसे नाटक बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को मंच देने के साथ-साथ समाज को भी यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि हर बच्चे तक शिक्षा और अवसर पहुँचना कितना आवश्यक है।
नाटक के अंत में बच्चों ने किताबों, खिलौनों और पतंगों के साथ मंच पर एक भव्य समापन प्रस्तुत किया, जिसमें शिक्षा, मित्रता और अच्छाई की जीत का संदेश गूँज उठा। दर्शकों ने तालियों के साथ बच्चों का उत्साहवर्धन किया और प्रस्तुति की भरपूर सराहना की।
‘खुल जा सिम-सिम’ इस बात का सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया कि यदि बच्चों को मंच, विश्वास और अवसर मिले, तो वे अपनी कला के माध्यम से न केवल मनोरंजन कर सकते हैं, बल्कि समाज को एक सार्थक संदेश भी दे सकते हैं। मंच निर्माण एवं रूप सज्जा तरुण ठाकुर और अंजलि राउत का रहा, नृत्य संरचना पारुल गुप्ता एवं दीपाली ठाकुर का, वेषभूषा हुमा का तथा सह निर्देशन रोहित सिंह का रहा। प्रबंधन आकाश नेमा तथा फ्लैशलाइट टीम का।


