June 24, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

यूबीटी के बागी सांसदों आए इधर तो बोले डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे, ‘ऑपरेशन टाइगर’ सफल हुआ

मुंबई, 22 जून । शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को उस वक्त करारा झटका लगा है, जब उनके 6 बागी सांसदों ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना ज्वाइन कर ली। एकनाथ शिंदे ने कहा कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ सफल हुआ। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ‘मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सब कुछ कह दिया है। ‘ऑपरेशन टाइगर’ सफल रहा। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि ऑपरेशन टाइगर सफल रहा। मैं सभी छह सांसदों का शिवसेना परिवार में स्वागत करना चाहता हूं। उनके आने से शिवसेना की ताकत काफी बढ़ गई है। मंत्री शंभूराज देसाई ने कहा कि जो सांसद आज आए हैं, उन्हें बागी नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने एक भूमिका अपनाई है। ये लोग अपने चुनाव क्षेत्र की समस्याओं और जनहित के कामों के लिए, जिनका वादा उन्होंने चुनाव के दौरान किया था, ढाई साल तक काम करना चाहते थे, लेकिन उनकी पार्टी के नेतृत्व ने उनका साथ नहीं दिया। इस पर उन्होंने लोकसभा क्षेत्रों के लोगों की भलाई के लिए शिंदे के नेतृत्व में आने का फैसला लिया। हम स्वागत करते हैं। हम लोग शिवसेना को बढ़ाने का काम करेंगे। शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने कहा कि हर कोई अपनी राजनीतिक सुरक्षा को लेकर चिंतित है। उन्हें भविष्य में जनता की सेवा करनी है। अगर पार्टी नेता उनसे बात नहीं करेंगे तो वे क्या करेंगे। इन छह लोगों के आने से महाराष्ट्र में हमारी शिवसेना केंद्रीय स्तर पर नंबर वन पार्टी बन रही है।

महाराष्ट्र में शिवसेना अब सांसदों की संख्या के मामले में नंबर वन पार्टी बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि 6 सांसद दो साल पहले चुनकर आए थे, वह जनता की सेवा करना चाहते थे, लेकिन उनकी पार्टी के नेतृत्व ने साथ नहीं दिया। विकास करने के लिए वे एकनाथ शिंदे के साथ आए। शिवसेना सांसद ज्योति वाघमारे ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताया है, क्योंकि हमारे नेता लोगों से मिलते हैं, उनका दुख समझते हैं और उन्हें सशक्त बनाते हैं। वहीं दूसरी ओर, यूबीटी के नेता तो अपने घरों से बाहर भी नहीं निकलते हैं। हम सभी का स्वागत करते हैं। एनसीपी नेता जीशान सिद्दीकी ने कहा कि मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि अगर कोई प्रतिनिधि अपनी पार्टी में खुश नहीं है, क्योंकि उन्हें बोलने या अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल रहा है, या वे शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो जाहिर है कि वे वहां जाएंगे जहां उनकी बात सुनी जाएगी।

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