June 24, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

बायोमेट्रिक सिस्टम की वजह से दरवाजा लॉक, बिजली के तार के सहारे नीचे उतरे’, लखनऊ अग्निकांड में बचे आसिफ की आपबीती

‘ लखनऊ, 23 जून  लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कमर्शियल बिल्डिंग में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में बाल-बाल बचे मोहम्मद आसिफ ने बताया कि बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर बने स्टूडियो का एंट्री गेट बायोमेट्रिक सिस्टम की वजह से लॉक हो गया था और वह बिजली के तार के सहारे नीचे उतरे। आईएएनएस से ​​बात करते हुए आसिफ ने कहा, “हम लंच के बाद बैठे थे और दोबारा काम शुरू करने ही वाले थे कि स्टाफ के लोग आए और बताया कि शॉर्ट सर्किट जैसा कुछ हुआ है और आग लग गई है।” आसिफ ने कहा, “हम धीरे-धीरे बाहर निकलने लगे। जब हम बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, तो बायोमेट्रिक मशीन पर अटेंडेंस लगा रहे थे,

लेकिन बिजली नहीं थी और फिंगरप्रिंट सिस्टम काम नहीं कर रहा था। दरवाजा भी नहीं खुल रहा था। किसी तरह, हम दूसरे कमरे में गए और एक दरवाजे से बाहर निकले। तब तक सीढ़ियों में धुआं भर चुका था। हम वापस भागे, तौलिये से अपना मुंह ढका और बचने की कोशिश की। जब हम खिड़की के पास गए, तो और ज्यादा धुआं अंदर आ रहा था।” आसिफ ने बताया कि “हमने एक छोटी खिड़की के पास से गुजरता हुआ बिजली का तार देखा। हमने उस तार के सहारे नीचे उतरने की कोशिश की। मैं और चार-पांच अन्य लोग उसके सहारे नीचे आ पाए।” उन्होंने बताया कि दम घुटने से बचने की कोशिश में कुछ लोगों ने खुद को वॉशरूम में बंद कर लिया। लेकिन वे बच नहीं पाए।” आसिफ़ ने कहा, “हमारे एक साथी जयंत गुप्ता ने कांच की खिड़की तोड़ी और वहां से कूदने की कोशिश की, लेकिन वह लोहे की रेलिंग पर गिर गए, जिससे उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई। वह करीब आधे घंटे तक सड़क पर पड़े रहे, जिसके बाद एम्बुलेंस आई।” उन्होंने कहा, “फायर ब्रिगेड एक घंटे से ज़्यादा समय के बाद पहुंची। मुझे नहीं पता कि वे कितने लोगों को बचा पाए होंगे।” उन्होंने याद करते हुए बताया कि आग इतनी तेज थी कि 100 मीटर दूर से भी उन्हें अपनी त्वचा जलती हुई महसूस हो रही थी। आसिफ़ ने कहा कि फायर अलार्म काम नहीं कर रहा था। हमें लगभग एक घंटे बाद मदद मिली। बाहर लोग चिल्ला रहे थे, हमसे बाहर आने को कह रहे थे और बता रहे थे कि आग पूरी बिल्डिंग में फैल गई है। हमें आग की गंभीरता का अंदाजा नहीं हुआ क्योंकि अंदर सिर्फ धुआं भरा हुआ था।” वहीं, इस हादसे को देखने वाली माला निगम ने भी कहा कि आग की लपटें इतनी तेज थीं कि किसी के लिए भी जान बचाने के लिए बिल्डिंग के अंदर जाना मुमकिन नहीं था।

उन्होंने आईएएनएस को बताया, “ग्राउंड फ्लोर पर एक पेट शॉप थी जिसमें कुत्ते, बिल्लियां और दूसरे पालतू जानवर थे। वहां मौजूद लोगों ने जल्दी-जल्दी पिंजरे बाहर खींचकर और कुछ जानवरों को बाहर फेंककर उन्हें बचाने की कोशिश की। ऊपर से सिर्फ़ कुछ ही लोग नीचे आ पाए, दो-तीन बच्चे कूद गए और घायल हो गए। उसके बाद आग इतनी तेज हो गई कि किसी को भी बचाना मुमकिन नहीं रहा।” उन्होंने आगे कहा कि अगर फायरफाइटर्स छत तक पहुंच पाते तो शायद और बच्चों को बचा सकते थे। माला ने कहा, “छत का दरवाजा शटर से लॉक था। बच्चे फंस गए और अंदर ही बंद रह गए। मैं उस मंजर को बयां नहीं कर सकती। बच्चे घबराहट में अपने माता-पिता को फोन कर रहे थे, कुछ ने तो खुद को बचाने की कोशिश में वॉशरूम में बंद कर लिया था।” –

 

अन्य ख़बरें

विदेश भेजने के नाम पर ठगी करने वाला गिरफ्तार, बीटेक पास आरोपी करता था ठगी

Newsdesk

अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने 31.5 लाख ग्राहकों को मानसून के संभावित व्यवधानों से बचाने के लिए कसी कमर, आपदा प्रबंधन व्यवस्था को किया मजबूत

Newsdesk

राष्ट्रपति मुर्मु ने अलका याग्निक, ममूटी समेत 65 हस्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading