किरनाई मंदिर को पर्यटन से जोड़ा जायेगा-डॉ.गहरवार
मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन प्रतिमाओं और धरोहर का गहन निरीक्षण किया,कई चौकाने वाले गौरवशाली तथ्य सामने आए…..किरनापुर/बालाघाट जिले के ऐतिहासिक पुरातात्विक महत्व और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट के संग्रहाध्यक्ष डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार ने गत दिवस 25/06/2026 को किरनापुर के पुरातात्विक अवशेष का 4 घंटे तक गहन अध्ययन किया। जिसमें स्थित प्रसिद्ध किरनाई मंदिर का अवलोकन अपनी टीम के साथ किया। जिसमें राजेन्द्र कुमार ब्रम्हे, दिनेश कुमार नेमा शामिल थे। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में मौजूद प्रतिमाओं और पीपल वृक्ष का बारीकी से निरीक्षण किया और उनके प्राचीनतम होने का दावा किया। बताया गया कि निरीक्षणोंपरांत संग्रहाध्यक्ष डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार ने किरनाई मंदिर में स्थापित माता रानी की मुख्य प्रतिमा लगभग 300-400 वर्ष पूर्व की है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में स्थित हनुमान प्रतिमा को करीब 250 वर्ष, गणेश प्रतिमा 300 वर्ष की बताया गया है। मूर्तियों की बनावट उनकी शैली और पत्थरों की स्थिति के आधार पर यह आकलन किया गया। जो इस क्षेत्र के समृद्ध इतिहास की ओर आकर्षित करती है।
प्राचीन पीपल का वृक्ष लगभग 400 वर्ष पूर्व और शिवलिंग 10 वीं शताब्दी का और मूर्तियों के अलावा मंदिर परिसर में लगा विशाल पीपल का वृक्ष भी शोध टीम के लिए आकर्षक का केंद्र रहा। संग्रहाध्यक्ष डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार के अनुसार यह पीपल का वृक्ष भी काफी पुराना (सदियों प्राचीन) है, जो लम्बे समय से धार्मिक स्थल की ऐतिहासिकता और आस्था को अपने आप में समेटे हुए है।
*पुरातत्व के नजरिए से बढ़ेगा महत्व…..*
इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय के इस खुलासे के बाद किरनापुर के किरनाई मंदिर का धार्मिक के साथ ही साथ ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व भी काफी बढ़ गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस प्राचीन स्थल के सही रखरखाव और शोध के क्षेत्र में पर्यटन और इतिहास को जानने की रुचि रखने वालों की संख्या बढ़ेगी।
*यहाँ भी किया अवलोकन*
इसके उपरांत शोध टीम ने किरनापुर में स्थित ब्रम्हचर्य मंदिर का भी अवलोकन किया जो पूर्व में चारों ओर खुला था, जिसके अवशेष ऐतिहासिकता का प्रमाण था। वर्तमान में चारों ओर से रहवासियों ने मकान बनाने के परिप्रेक्ष्य में इस ब्रम्हचर्य मंदिर का मूल स्वरूप विलोपित के साथ ही पूर्व मंदिर के ऊपर सीमेंट का प्लास्टर करने के कारण मूल कलाकृति नष्ट कर दिया गया है।
इसके बाद इदगाह के समीप, जहाँ बगीचे का निर्माण किया जा रहा है, वहाँ के ध्वस्त शिव मंदिर, नंदी का अवलोकन किया गया। निरीक्षण दौरान देखने आया पूर्व में यहाँ प्राचीन शिव लिंग था, इसके ऊपर मिट्टी-मुरुम डालकर भूमिगत कर दिया है। शिव लिंग को यथावत शीघ्र निकालने के लिए अनुविभागीय दण्डाधिकारी,
किरनापुर को पत्र भेजा गया।
*उपस्थित लोगों में शामिल रहे*
किरनाई मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल, सचिव उग्रेंद्र मेश्राम, भरत यादव, महेंद्र तारन, पं.मनीष उपाध्याय, आशीष सोनी, सुरेश रतनेरे, शिव तारन, संजय शारड़ा, बंटी अर्जुनवार, दीपक दाते, नन्हे बहेकार आदि थे।


