अहमदाबाद में बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ अभियान में संगठित नेटवर्क का खुलासा, गरीब परिवारों के बच्चों को गुजरात भेजने की आशंका
अहमदाबाद में बच्चों से भीख मंगवाने के संगठित नेटवर्क की जांच में राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ सरपंचों की कथित भूमिका सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की संयुक्त कार्रवाई के दौरान यह बात सामने आई कि बच्चों को सड़क से हटाने की मुहिम के पीछे केवल स्थानीय भिक्षावृत्ति नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
आरोप है कि राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ गांवों से गरीब परिवारों के बच्चों को गुजरात भेजा जाता था। इन बच्चों को अहमदाबाद के ट्रैफिक सिग्नल, मंदिरों, मॉल, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास भीख मांगने के लिए लगाया जाता था। जांच में कुछ सरपंचों या गांव स्तर के प्रभावशाली लोगों पर बच्चों को भेजने में बिचौलिये जैसी भूमिका निभाने का संदेह जताया गया है।
यह मामला बाल भिक्षावृत्ति से आगे बढ़कर संभावित बाल तस्करी और स्थानीय सत्ता के दुरुपयोग का संकेत देता है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह बेहद गंभीर सवाल खड़ा करेगा कि जिन लोगों पर गांवों में संरक्षण और जनहित की जिम्मेदारी होती है, वे ही कमजोर परिवारों और बच्चों के शोषण में शामिल कैसे हो सकते हैं।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कितने बच्चे शामिल थे, उन्हें किन गांवों से लाया गया, परिवारों को किस तरह राजी किया गया और अहमदाबाद में इनके ठहरने, निगरानी और कमाई की वसूली कौन करता था। बच्चों के रेस्क्यू, पुनर्वास, स्कूल में दाखिले और परिवारों की आर्थिक स्थिति की जांच भी इस मामले में महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।
यह प्रकरण बताता है कि बाल भिक्षावृत्ति केवल गरीबी की समस्या नहीं, बल्कि कई बार संगठित शोषण, तस्करी और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ा अपराध भी हो सकती है। ऐसे मामलों में केवल सड़क से बच्चों को हटाना पर्याप्त नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क, बिचौलियों और संरक्षण देने वालों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।


