जबलपुर। जिले में गेहूं खरीदी के दौरान सामने आई शॉर्टेज और अनियमितताओं के मामलों में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। अधिकारियों के अनुसार खरीदी प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों के बाद संबंधित खरीदी समूहों और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए गए थे। जांच पूरी होने के बाद दोषियों से निर्धारित राशि की वसूली भी कर ली गई है।
प्रशासन ने बताया कि शासन से आवश्यक अनुमति मिलने के बाद अब वसूली गई यह राशि किसानों को लौटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह भुगतान किसानों द्वारा बेचे गए गेहूं की मात्रा के अनुपात में किया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि अगले सप्ताह तक पूरी भुगतान प्रक्रिया पूरी कर ली जाए, ताकि प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत मिल सके।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भुगतान के लिए समानुपातिक (प्रोपोर्शनल) फार्मूला अपनाया जाएगा। यानी जिस किसान ने जितनी अधिक मात्रा में गेहूं बेचा है, उसे उसी अनुपात में राशि मिलेगी। उदाहरण के तौर पर यदि 100 क्विंटल गेहूं बेचने वाले किसान को 10 रुपये प्रति निर्धारित अनुपात के अनुसार भुगतान मिलता है, तो 50 क्विंटल गेहूं बेचने वाले किसान को उसी अनुपात में 5 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य सभी किसानों के साथ समान और पारदर्शी व्यवहार सुनिश्चित करना है।
प्रशासन का कहना है कि गेहूं खरीदी में हुई शॉर्टेज के मामले में जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय कर उनसे राशि वसूल ली गई है। अब उसी राशि को शासन की स्वीकृति के अनुरूप किसानों के बीच वितरित किया जाएगा। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न होगी और पात्र किसानों को उनका भुगतान समय पर मिलेगा।
वहीं जिले के कुछ अन्य क्षेत्रों में धान या अन्य अनाज के कथित गबन की चर्चाओं पर प्रशासन ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई मामला उनके आधिकारिक संज्ञान में नहीं है। इस संबंध में न तो कोई लिखित शिकायत प्राप्त हुई है और न ही शासन या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पत्र मिला है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अटकलों की पुष्टि करना उचित नहीं होगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जैसे ही किसी अन्य मामले में अधिकृत शिकायत या विभागीय सूचना प्राप्त होगी, नियमानुसार जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने दोहराया कि किसानों के हितों की रक्षा करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


