August 1, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि एवं कमला नेहरू की जयंती पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित


जबलपुर। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के मध्यप्रदेश स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार संगठन प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अजय नारायण सितलानी के निर्देशन में प्रत्येक माह की पहली तारीख को राष्ट्रीय गीत एवं वंदे मातरम् गायन के आयोजन की श्रृंखला के अंतर्गत, शहर जिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार संगठन प्रकोष्ठ के शहरी अध्यक्ष राजेन्द्र रज्जू सराफ एवं जिला ग्रामीण अध्यक्ष नारायण सिंह शर्मा के संयोजन में 01 अगस्त 2026, प्रातः 10 बजे जवाहरगंज वार्ड स्थित लोकमान्य तिलक भूमि, तलैया स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।

कार्यक्रम में शहर जिला कांग्रेस सेवादल के अध्यक्ष पं. सतीश तिवारी, गांधी चौपाल के प्रदेश संयोजक एड. प्रशांत मिश्रा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज नामदेव, कांग्रेस नेता अरुण पावर, मुन्ना सेन विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर नगर अध्यक्ष राजेन्द्र रज्जू सराफ, जिला ग्रामीण अध्यक्ष नारायण सिंह शर्मा, एड. प्रकाशचंद गौलछा, जिला प्रभारी केशव प्रसाद चौरसिया, रमेश यादव, वी. हनुमत राव, पवन सोनी, पं. आशीष व्यास, चुन्नीलाल नीखरा, विष्णु विनोदिया, सतेन्द्र जैन, अजीत जैन, अशोक यादव, जितेन्द्र यादव, श्याम सोलंकी, सत्यम तिवारी (बाबा), पार्षद गुड्डू नबी, आशीष तिवारी, गनेश केशरवानी, ओमप्रकाश शर्मा, ओमप्रकाश जायसवाल, अरुण राजनेकर, अंकित नीखरा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक एवं कमला नेहरू के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सेवादल अध्यक्ष पं. सतीश तिवारी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के जीवन एवं उनके राष्ट्रवादी विचारों पर प्रकाश डाला। गांधी चौपाल के प्रदेश संयोजक एड. प्रशांत मिश्रा ने कमला नेहरू एवं लोकमान्य तिलक के राजनीतिक जीवन, त्याग और संघर्ष का स्मरण कराया।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज नामदेव ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक वर्ष 1890 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े। उन्होंने कांग्रेस के उदारवादी रवैये का विरोध किया तथा स्वशासन की मांग को लेकर वे उस समय के प्रमुख उग्र राष्ट्रवादी नेताओं में शामिल थे। वर्ष 1905-1907 का स्वदेशी आंदोलन भी कांग्रेस के भीतर उदारवादी एवं उग्रवादी विचारधाराओं के विभाजन का प्रमुख कारण बना। उन्होंने कहा कि लोकमान्य तिलक का अमर उद्घोष “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा” पूरे देश में स्वतंत्रता का संदेश बना। साथ ही उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जबलपुर की तिलक भूमि, तलैया भी स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र रही, जहाँ अनेक नौजवानों ने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई।

कार्यक्रम का समापन जन-गण-मन एवं वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। अंत में पवन सोनी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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