कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे 500 से अधिक पटवारी
जबलपुर। अपनी लंबित मांगों के निराकरण को लेकर जिले सहित प्रदेशभर के पटवारियों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के पहले ही दिन जबलपुर जिले के करीब 500 पटवारी कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित होकर धरने पर बैठ गए। पटवारियों ने मैदानी कार्यों का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया है, जिससे राजस्व विभाग की अनेक ऑनलाइन और ऑफलाइन सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं। हड़ताल के चलते आम नागरिकों के साथ किसानों और विद्यार्थियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
पटवारी संघ का कहना है कि लंबे समय से उनकी विभिन्न मांगें शासन स्तर पर लंबित हैं। कई दौर की चर्चा और ज्ञापन देने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे नाराज होकर प्रदेशभर के पटवारियों ने कलमबंद अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया है। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
जिले की सभी तहसीलों के पटवारी आंदोलन में शामिल
जबलपुर, रांझी, पाटन, सिहोरा, पनागर, कुंडम, शहपुरा और मझौली सहित जिले की सभी तहसीलों के पटवारी इस आंदोलन में शामिल हुए हैं। सुबह से ही बड़ी संख्या में पटवारी कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे और शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया। पटवारियों ने मैदानी निरीक्षण, राजस्व अभिलेखों के संधारण और अन्य प्रशासनिक कार्यों से स्वयं को अलग रखा है।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार से लगातार संवाद के बावजूद कैडर रिव्यू, पदोन्नति, समयमान वेतनमान, विभागीय परीक्षा और अन्य सेवा संबंधी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। इसी कारण मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
इन सेवाओं पर पड़ा असर
पटवारियों की हड़ताल का सबसे अधिक असर राजस्व विभाग की उन सेवाओं पर पड़ेगा, जिनका सीधा संबंध आम नागरिकों से है। नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, खसरा-खतौनी की नकल, गिरदावरी, अतिक्रमण संबंधी कार्रवाई, कब्जा दिलाने की प्रक्रिया तथा भूमि अभिलेखों से जुड़े अधिकांश कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा कानून-व्यवस्था से जुड़े राजस्व दायित्व, फील्ड निरीक्षण और अन्य कार्यालयीन कार्यों पर भी असर पड़ रहा है।
किसानों और विद्यार्थियों की बढ़ सकती है परेशानी
हड़ताल का प्रभाव किसानों पर भी पड़ने लगा है। फसल गिरदावरी, भूमि नामांतरण और सीमांकन जैसे कार्य रुकने से कृषि संबंधी प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं। वहीं जाति, आय और मूल निवासी प्रमाण-पत्र के लिए आवश्यक पटवारी प्रतिवेदन समय पर नहीं मिलने से विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। कई सरकारी योजनाओं और शैक्षणिक प्रवेश प्रक्रियाओं में भी विलंब की आशंका जताई जा रही है।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक शासन उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेता, तब तक अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी। दूसरी ओर, प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो राजस्व विभाग के नियमित कार्यों के साथ-साथ नागरिक सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।


