जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के बैनर तले सोमवार को कॉफी हाउस में आयोजित बैठक में चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्रस्तावित विभाजन और फंड के बंटवारे को लेकर चिंता जताई गई। बैठक में डॉ. पी.जी. नाजपांडे सहित मंच के सदस्यों ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में जबलपुर के साथ असमान व्यवहार किया जा रहा है।
बैठक में बताया गया कि 20 जुलाई को विधानसभा सचिवालय के राजपत्र में प्रकाशित विधेयक के अनुसार उज्जैन को 6 संभाग, 70 मेडिकल कॉलेज और लगभग 60 हजार छात्र मिलेंगे, जबकि जबलपुर के हिस्से में 4 संभाग, 15 कॉलेज और करीब 12 हजार छात्र ही आएंगे। मंच के सदस्यों का कहना है कि इससे क्षेत्रीय असंतोष बढ़ सकता है।
सदस्यों ने यह भी दावा किया कि प्रस्तावित 110 करोड़ रुपये के बजट में जबलपुर को केवल 10 करोड़ रुपये मिलने का प्रावधान है। वहीं वर्तमान चिकित्सा विश्वविद्यालय के लगभग 250 करोड़ रुपये के रिजर्व फंड में से 200 करोड़ रुपये उज्जैन और 50 करोड़ रुपये जबलपुर को दिए जाने की तैयारी की जा रही है। मंच ने इसे आर्थिक असमानता बताते हुए कहा कि इससे जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
मंच ने मुख्यमंत्री से मांग की कि चिकित्सा विश्वविद्यालय के विभाजन और वित्तीय संसाधनों का बंटवारा समानता के आधार पर किया जाए, ताकि जबलपुर विश्वविद्यालय आर्थिक रूप से सशक्त बन सके। बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि इस संबंध में जल्द उचित निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
बैठक में रजत मार्गव, डॉ. ए.बी. श्रीवास्तव, सुभाष चंद्रा, टी.के. रायघटक, एडवोकेट वेदप्रकाश अथौलिया, संतोष श्रीवास्तव, डी.के. सिंह, एडवोकेट घनश्याम सोनकर, यशवंत कोष्टा, डी.आर. लखेरा, अशोक यादव, श्याम सोलंकी, एडवोकेट बृजेश साहू तथा राममिलन शर्मा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।


