महाराजा मार्तंड कॉलेज में प्रशासनिक विवाद गहराया, शिक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल
कोतमा। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में उच्च शिक्षा का दीप प्रज्वलित करने के उद्देश्य से तत्कालीन विधायक कुमार मृगेन्द्र सिंह के प्रयासों से वर्ष 1969 में स्थापित महाराजा मार्तंड महाविद्यालय इन दिनों प्रभारी प्राचार्य की कुर्सी को लेकर विवादों के केंद्र में है। जिस महाविद्यालय ने वर्षों से प्रशासन, राजनीति और विभिन्न क्षेत्रों को अनेक प्रतिभाएं दीं, वहीं अब प्राचार्य पद को लेकर चल रहे विवाद से शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने मोहम्मद मोबीन को महाविद्यालय का प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया है। इसके बावजूद आरोप है लकडा सर सार्थक एप में उपस्थित और खेल विभाग में किए गए घोर भ्रष्टाचार के कारण इनका स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर शासकीय महाविद्यालय बदेरा किया गया है । जबकि सहायक प्राध्यापक जबेदियुस लकड़ा स्वयं को प्रभारी प्राचार्य बताते हुए प्राचार्य कक्ष में बैठ रहे हैं तथा प्राचार्य के पदनाम से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं।
प्रभारी प्राचार्य मोहम्मद मोबीन ने बताया कि उन्हें शासन के विधिवत आदेश के आधार पर प्रभारी प्राचार्य का दायित्व सौंपा गया है। उनका आरोप है कि जबेदियुस लकड़ा एक माह के लिए प्राप्त उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश का हवाला देकर स्वयं को प्रभारी प्राचार्य बताते हुए कर्मचारियों से शासकीय दस्तावेज मंगा रहे हैं और उन पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, जबकि शासन का आदेश उनके पक्ष में है।
वहीं, इस मामले में लकड़ा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें उच्च न्यायालय से एक माह का स्थगन आदेश प्राप्त हुआ था। उनका कहना है कि उस अवधि के समाप्त होने के बाद भी उच्च शिक्षा विभाग से उन्हें कोई नया आदेश प्राप्त नहीं हुआ, इसलिए वे स्वयं को प्रभारी प्राचार्य मानते हुए कार्य कर रहे हैं।
इस संबंध में अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग, रीवा महेंद्र मणि द्विवेदी ने कहा कि शासन के आदेशानुसार मोहम्मद मोबीन ही प्रभारी प्राचार्य हैं। यदि कोई अन्य व्यक्ति प्राचार्य की कुर्सी पर बैठकर स्वयं को प्राचार्य के रूप में प्रस्तुत करता है या प्राचार्य के पदनाम से शासकीय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करता है, तो यह कदाचार की श्रेणी में आ सकता है और इस पर प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
महाविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि प्राचार्य पद को लेकर जारी यह विवाद शिक्षण व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। उनका मानना है कि उच्च शिक्षा विभाग को शीघ्र स्पष्ट आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि महाविद्यालय में सामान्य प्रशासनिक एवं शैक्षणिक वातावरण बहाल हो सके।


