विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस लोक निर्माण मंत्री ने किया संगोष्ठी को सम्बोधित
विभाजन विभीषिका पर भाजपा ने निकाला मौन जुलूस
जबलपुर । विभाजन की विभीषिका के संस्मरण को याद करते हुए जब हम मिलते है, उस समय के चित्र देखते है तब उस कालखंड की चीखें सुनाई देती हैं विभाजन के स्मरण से ही मन व्यथित हो जाता है, आजादी हमे मिली पर उसकी जो कीमत हमे चुकानी पड़ी है उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। हम 15 अगस्त को पूरे आत्मविश्वास के साथ भारत माता के भविष्य की कामना करते हुए आजादी का जश्न मनाते हैं एवं उन महापुरुषों को याद करते है जिनका देश में योगदान है परंतु 14 अगस्त को विभाजन की विभीषिका का संस्मरण भी याद आते ही मन अत्यंत दुखी होता है यह बात मध्य प्रदेश शासन की लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में सरदार वल्लभभाई पटेल भवन में कहीं।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित संगोष्ठी सांसद आशीष दुबे, राज्यसभा सांसद श्रीमती सुमित्रा बाल्मीकि, जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, प्रदेश कोषाध्यक्ष अखिलेश जैन, विधायक अभिलाष पांडे, अजय विश्नोई, नीरज सिंह, महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे, जेडीए अध्यक्ष संदीप जैन, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी श्रीकांत साहू, प्रदेश प्रवक्ता डॉ वाणी अहलूवालिया, सदानंद गोडबोले, स्वाति गोडबोले, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज बिज, निशक्त जन कल्याण प्रकोष्ठ प्रदेश संयोजक संदीप रजक, जेडीए उपाध्यक्ष प्रशांत केशरवानी, महामंत्री पंकज दुबे, रंजीत पटेल, अमित सोनू बचवानी की उपस्थिति में आयोजित हुई।
संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि आजादी के पूर्व भारत के विभाजन के समय भारत के बच्चो से लेकर वृद्ध तक की जिस तरह से हत्या की गई वह भयावह समय था, उसको याद करते हुए आखे नम हो जाती हैं, उस समय महात्मा गांधी ने कहा था कि देश का विभाजन मेरे शरीर के टुकड़ों पर ही होगा पर कांग्रेस को देश की आज़ादी के साथ ही विभाजन की भी उतनी ही जल्दी थी क्योंकि जब मुस्लिम लीग ने जिन्ना के नेतृत्व में विभाजन की मुहिम को तेज किया तब गांधीजी ने कांग्रेस से पूछा कि विभाजन क्यों आवश्यक है एवं बाबा साहब के कहा कि विभाजन भारत की प्रकृति के प्रतिकूल है पर जब देखा गया कि कांग्रेस को सत्ता पाने की आतुरता है तब उन्होंने कुछ शर्ते रखी पर कांग्रेस ने उन्हें कभी नहीं माना, कांग्रेस सदैव बाबा साहब का अपमान करती रही है जैसे ही 15 अगस्त नजदीक आने लगा तनाव बढ़ता गया कई राज्यों में हिंसा, हत्या महिलाओं, बच्चियों के साथ प्रताड़ना हम शब्दों बता नहीं सकते। अगस्त के पहले सप्ताह में जब देश में यह स्थिति थी तब कांग्रेस क्या कर रही थी, तब नेहरू जी को प्रधानमंत्री बनने की चिंता थी , विभाजन में 20 लाख से ज्यादा लोगों की हत्या हुई कांग्रेस जश्न मना रही थी, नेहरू प्रसन्न थे इतनी बड़ी संख्या में कत्ले आम के साथ देश की आजादी का स्वागत सबने भरे मन से किया क्योंकि लोगों के मन में विभाजन का भी दंश था ।
श्री सिंह ने कहा कि आजादी का जश्न मनाते है पर उसके साथ हमे विभाजन का यह संस्मरण भी याद रहता है कि लोगों ने अपने परिवार संपत्ति को खोया है, एक तरफ देश प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी है जो 2047 तक के भारत की चिंता कर रहे है देश 2047 में कैसा हो भारत का भविष्य कैसा हो प्रतिपल देश की चिंता करते हुए काम करना प्रधानमंत्री जी के मन में है एक तरफ कांग्रेस सिर्फ अपने और परिवार के विषय में विचार करती आई है। आज इस विभाजन विभीषिका के स्मृति के अवसर पर हम उन लोगों याद करते हैं जिन्होनें अपने प्राण गंवाए है सब कुछ त्याग दिया पर भारत के प्रति अपनी आस्था को अमिट रखा,
संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए सांसद आशीष दुबे ने कहा कि विभाजन की विभीषिका का दंश बहुत ही भयावह था तत्कालीन सरकार ने देश को दो टुकड़ों में बांट दिया हमने विभाजन में अपना भूभाग भी दिया और इसके बदले में हमें लाशें प्राप्त हुई लोग अपना सर्वस्व त्याग कर हिंदुस्तान में बसने के लिए आए ताकि उनकी पीढ़ी परिवार सुरक्षित रह सकें।भारत का विभाजन केवल देश की सीमाओं का विभाजन नहीं था, बल्कि यह करोड़ों लोगों के जीवन, परिवारों और भावनाओं पर गहरा आघात था। लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। असंख्य लोगों ने अपने प्राण गंवाए और परिवार बिछड़ गए। विभाजन की इस त्रासदी को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि समाज इतिहास से सीख लेकर राष्ट्र की एकता और अखंडता को और मजबूत कर सके।
भाजपा अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का उद्देश्य उन सभी पीड़ितों और विस्थापितों को श्रद्धांजलि अर्पित करना है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी साहस, धैर्य और राष्ट्रनिष्ठा का परिचय दिया। आज आवश्यकता है कि हम जाति, पंथ और क्षेत्र से ऊपर उठकर राष्ट्र की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता के लिए कार्य करें।
संगोष्ठी में उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने विभाजन की विभीषिका में अपने प्राण गंवाने वाले सभी नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने का संकल्प लिया।
संगोष्ठी में देश के विभाजन के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों, विस्थापित परिवारों की पीड़ा, संघर्ष और उनके अदम्य साहस को स्मरण किया गया।
पीड़ित जनों का हुआ सम्मान
इस अवसर पर विभाजन पीड़ित परिवारों से निर्मल राज भाटिया,, विनोद कुमार तलरेजा, प्रदीप आहूजा, संजीव आनंद, विमल अरोरा, उद्धवदास परवानी का सम्मान मंच द्वारा किया गया।
विभाजन विभीषिका पर निकला मौन जुलूस
संगोष्ठी के पूर्व भारतीय जनता पार्टी जबलपुर महानगर द्वारा मालवीय चौक से विभाजन की विभीषिका की स्मृति में मौन जुलूस गया। जो मालवीय चौक से प्रारंभ होकर खंडेलवाल फर्नीचर होते हुए वंदे मातरम चौक पर समाप्त हुआ जुलूस में सभी ने पीड़ित पर परिवारों की स्मृति में मौन रखकर संवेदना व्यक्त की।
विभाजन विभीषिका स्मृति पर हुआ प्रदर्शनी का आयोजन
सरदार वल्लभभाई पटेल भवन में संगोष्ठी के पूर्व विभाजन विभीषिका स्मृति पर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमें उपस्थित जनों ने विभीषिका के संस्मरण को याद किया।
इस अवसर पर अभय सिंह ठाकुर, राजेश मिश्रा, तृष्णा चटर्जी, कौशल सूरी, सुधांशु गुप्ता, संकल्प पाठक, रीना राय, राहुल दुबे, रवि शर्मा, योगेश बिलोहा, युवा मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष योगेंद्र सिंह, महिला मोर्चा अध्यक्ष आत्मिका सिंह, अनुसूचित जनजाति मोर्चा अध्यक्ष संतोषी ठाकुर, किसान मोर्चा अध्यक्ष अभिनव यादव, पिछड़ा मोर्चा अध्यक्ष दशरथ पटेल, अनुसूचित जाति मोर्चा अध्यक्ष जागेश समुंद्रे, प्रशांत दुबे, कैलाश चक्रवर्ती, राहुल रजक, दिलीप पटेल, अमर पटेल, सपन यादव, रूपा राव, सोनिया रंजीत सिंह, सीमा सिंह, मीरा दुबे, पूजा रजक आदि उपस्थित थे।


