जबलपुर। मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी, जबलपुर में शनिवार को दो दिवसीय राज्य स्तरीय परामर्श ‘मीमांसा’ का शुभारंभ हुआ। 5 और 6 सितंबर को आयोजित इस कार्यक्रम में किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के दस वर्षों की प्रगति, चुनौतियों और आगामी दशक की प्राथमिकताओं पर मंथन किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने कहा कि किशोर न्याय प्रणाली की सफलता मामलों के निपटारे से नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव से आंकी जानी चाहिए। उन्होंने बाल-केंद्रित न्याय व्यवस्था, पुनर्वास, पुनःएकीकरण और विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।
उच्च न्यायालय की किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने आयु निर्धारण, दिव्यांगता, परिवार आधारित देखरेख, बाल विवाह तथा अधिनियम की धारा 3 के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया।
पॉक्सो समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया ने डेटा आधारित समीक्षा और बाल गवाहों के संवेदनशील मूल्यांकन की आवश्यकता बताई। यूनिसेफ भोपाल के चीफ ऑफ फील्ड ऑफिस विलियम हेनलॉन जूनियर और महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जी.वी. रश्मि (आईएएस) ने भी विचार रखे।
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल, रजिस्ट्रार जनरल धर्मिंदर सिंह, अजय प्रकाश मिश्र, कृष्णमूर्ति मिश्र, निदेशक उमेश कुमार पांडव, सदस्य सचिव कु. सुमन श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। स्वागत अनिल कुमार ने किया।


