ग्रामीणों से बोले- समूह में जंगल जाएं, बच्चों को अकेले न भेजें; वन विभाग से बाघों को रेस्क्यू करने की मांग
परसवाड़ा। पिछले कुछ दिनों से परसवाड़ा से लगे धुर्वा, सिलगी, शेरपार, लिंग, चीनी, पोंडी सहित आसपास के गांवों में लगातार बाघ के मूवमेंट की सूचनाओं के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। बाघों की लगातार मौजूदगी और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों की सूचना पर विधायक मधु भगत ने रविवार को प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा कर स्थिति की जानकारी ली और सावधानी बरतने की अपील की।
विधायक ने ग्रामीणों को सलाह दी कि वे अकेले जंगल की ओर न जाएं और समूह में ही जंगल अथवा खेतों की ओर जाएं। साथ ही हाथों में लाठी-डंडे रखने, बच्चों को अकेले जंगल की ओर नहीं भेजने तथा बाघ की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की बात कही।
दो से अधिक बाघ होने का दावा
मीडिया से चर्चा करते हुए विधायक मधु भगत ने कहा कि पिछले दिनों से परसवाड़ा के आसपास लगातार बाघ के मूवमेंट की जानकारी ग्रामीणों के माध्यम से मिल रही थी। उन्होंने कहा कि पोंडी, लिंग, धुर्वा, सिलगी और खरपड़िया क्षेत्र में दो या दो से अधिक बाघों के होने की जानकारी सामने आई है। लगातार मूवमेंट के बीच शेरपार में दो बैलों पर हमला और सिलगी में दो गायों को बाघ द्वारा मारे जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें बाघ के मूवमेंट की जानकारी मिली, उन्होंने वन विभाग के डीएफओ रेशम धुर्वे से चर्चा कर प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल वन अमले को भेजने और बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सीसीएफ गौरव चौधरी और जिला कलेक्टर को भी मामले की जानकारी देकर सक्रिय निगरानी की मांग की गई।
वन विभाग की गश्ती जारी, ग्रामीणों को किया जा रहा जागरूक
विधायक ने बताया कि भ्रमण के दौरान ग्रामीणों से जानकारी मिली कि प्रभावित गांवों में वन विभाग की टीम गश्त कर रही है तथा ग्रामीणों को सावधानी बरतने के लिए जागरूक किया जा रहा है। कुछ ग्रामीणों ने रात्रि के समय बिजली गुल होने की समस्या भी बताई, जिस पर उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कान्हा नेशनल पार्क की सीमा पर फेंसिंग की मांग
विधायक मधु भगत ने कहा कि परसवाड़ा क्षेत्र से लगे कान्हा नेशनल पार्क के कारण वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। उन्होंने कहा कि पार्क के कवर एरिया में करीब 15 फीट ऊंची तार फेंसिंग कराना आवश्यक है। इसके लिए वे स्वयं मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मांग रख चुके हैं और मुख्यमंत्री द्वारा जिला कलेक्टर को आवश्यक निर्देश दिए जाने की बात भी उन्होंने कही।
उन्होंने कहा कि कान्हा नेशनल पार्क के कोर जोन से लगे परार्पुर, मोहगांव और मोहनपुरी क्षेत्र में भी लंबे समय से वन्यजीवों की गतिविधियां चिंता का विषय बनी हुई हैं। अब परसवाड़ा से लगे गांवों में लगातार बाघों की मौजूदगी से ग्रामीणों में भय बढ़ रहा है।
‘अप्रिय घटना हुई तो प्रशासन होगा जिम्मेदार’
विधायक ने कहा कि बाघ के लगातार मूवमेंट के कारण ग्रामीणों में दहशत है। बच्चे स्कूल जाने में डर रहे हैं और ग्रामीण खेती-किसानी के काम से अकेले खेतों में जाने से भी संकोच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे लगातार प्रशासन और वन विभाग को स्थिति से अवगत करा रहे हैं। यदि क्षेत्र में किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो इसकी जवाबदेही प्रशासन की होगी।
उन्होंने वन विभाग की गश्ती को लेकर कहा कि टीम लगातार प्रभावित क्षेत्रों में भ्रमण कर रही है, जिसके लिए वन अमले को बधाई दी जानी चाहिए, लेकिन लगातार मूवमेंट के बावजूद बाघों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की कार्रवाई भी जरूरी है।
‘बाघों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए’
विधायक ने वन विभाग और कान्हा नेशनल पार्क के अधिकारियों से मांग की कि परसवाड़ा के आसपास विचरण कर रहे बाघों को योजनाबद्ध तरीके से रेस्क्यू किया जाए और उन्हें सुरक्षित एवं उपयुक्त स्थान पर छोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि वन विभाग और प्रशासन को संयुक्त रूप से योजना बनाकर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों के बीच बनी दहशत समाप्त हो और लोग बिना भय के अपने दैनिक कार्य कर सकें।


