सहारनपुर, सहायक पुरातत्व अधिकारी मनोज यादव ने सहारनपुर में ढहाए गए मस्जिद के निरीक्षण के बारे में बात की और वहां मौजूद कुएं एवं उसकी बनावट के महत्व के बारे में भी जानकारी दी। मनोज यादव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “सबसे पहले मैं यह साफ कर दूं कि यह एएसआई की टीम नहीं है। हम उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग के डायरेक्टर के निर्देश पर यहां आए हैं, और जैसा कि आपने देखा है, वहां मौजूद ढांचा एक कुएं जैसा दिखता है। वह उत्तर मध्यकाल से संबंधित लगती है। इसमें लाहौरी ईंटें लगी हैं, कुंए में इस्तेमाल बाइंडर मटीरियल (पुताई/जोड़ाई सामग्री) सुरखी और चूने का है।” उन्होंने बताया कि कुंए की प्राचीनता और स्वरूप की जांच के लिए हम लोग यहां आए थे। मनोज यादव कहते हैं, “सतह से इसकी गहराई 20 फीट है, इसका व्यास तीन फीट है और ईंटों का अनुपात 20×10×5 सेंटीमीटर है।
ऐतिहासिक समय के हिसाब से यह ढांचा मध्यकाल के बाद के दौर का है, इसलिए हम इसका समय लगभग 200-250 साल पहले का मान सकते हैं।” उन्होंने बताया कि इसके फ्रेम को देखते हुए अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कुंआ इतिहास के उत्तर मध्यकालीन कालखंड में 200 से 250 वर्ष रख सकते हैं। इस तरह का प्रचलन उत्तर मध्यकाल में रहा है। मनोज यादव कहते हैं, “राजस्व विभाग बता सकता है कि इसे कब बंद किया गया था और कब क्या हुआ था, लेकिन हमें जो सीधे तौर पर दिखा, वह यह था कि यह जमीन के स्तर से तीन फीट नीचे मिला।” उन्होंने आगे बताया कि यह मामला ऐसा नहीं है जिस पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। इसके हर पहलू की जांच करनी होगी। अब तक की जांच के आधार पर हम सीनियर अधिकारियों, इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के साथ नतीजों पर चर्चा करेंगे। हम एक रिपोर्ट तैयार करेंगे और उसे प्रशासन को सौंपेंगे।”


