नई दिल्ली। इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा और बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा नीतिगत बदलाव सामने आया है। दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) ने भारत में ऑनलाइन बाल यौन शोषण से जुड़े मामलों की सूचना सीधे भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेजने पर सहमति जता दी है। अब तक ऐसी किसी भी आपत्तिजनक गतिविधि की सूचना पहले अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी संस्था ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन’ (NCMEC) को भेजी जाती थी, जिसके बाद वह जानकारी भारत पहुंचती थी। सीधे रिपोर्टिंग शुरू होने से भारतीय पुलिस और साइबर एजेंसियों को खतरे में फंसे बच्चों तक फौरी तौर पर पहुँचने और त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। गूगल के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि कंपनी बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री का पता लगाने, उसे तुरंत हटाने और एजेंसियों को रिपोर्ट करने के लिए तकनीकी संसाधनों में लगातार बड़ा निवेश कर रही है।यह फैसला मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी) द्वारा पिछले सप्ताह लिए गए इसी तरह के निर्णय के ठीक बाद आया है। मेटा ने भी भारत सरकार के दबाव के बाद बाल यौन शोषण से जुड़े मामलों का डेटा सीधे संबंधित भारतीय जांच एजेंसियों से साझा करने की व्यवस्था लागू की थी।सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत में काम कर रही सोशल मीडिया और तकनीकी कंपनियों के लिए बच्चों की डिजिटल सुरक्षा एक गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) सिद्धांत है। अधिकारियों के मुताबिक, NCMEC के जरिए सूचना आने में प्रक्रियागत देरी होती थी, जिससे उन मामलों में भारी नुकसान होता था जहाँ किसी बच्चे की जान या सुरक्षा पर तत्काल गंभीर खतरा मंडरा रहा होता था।
2025 का रिकॉर्ड: वर्ष 2025 में NCMEC की साइबरटिपलाइन को दुनियाभर से बच्चों के संभावित यौन शोषण से जुड़ी 2.13 करोड़ से अधिक रिपोर्ट्स प्राप्त हुईं।सीधा चैनल क्यों जरूरी: भले ही वैश्विक स्तर पर NCMEC प्राथमिक सूचना केंद्र बना हुआ है, लेकिन भारत सरकार ने विदेशी मध्यस्थ पर निर्भरता खत्म करने और रियल-टाइम एक्शन के लिए प्रत्यक्ष रिपोर्टिंग चैनल स्थापित करने की पहल की है।कानूनी दायरा: भारत में बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री बनाना, देखना, अपने पास रखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना पोक्सो (POCSO) एक्ट और आईटी कानून के तहत गैर-जमानती अपराध है।प्रथम बार दोषी पाए जाने पर : 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माना।दोबारा अपराध करने पर : 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माना।नागरिकों के लिए सलाह: यदि इंटरनेट पर कहीं भी ऐसी सामग्री दिखाई दे, तो उसे किसी भी हाल में डाउनलोड, फॉरवर्ड या शेयर न करें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर तत्काल फ्लैग करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in) अथवा स्थानीय पुलिस/साइबर सेल में सूचना दर्ज कराएं।


