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September 30, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

जूनियर वकीलों को मिलेगा न्यूनतम स्टाइपेंड का हक

हाईकोर्ट ने छह महीने में गाइडलाइन बनाने के दिए निर्देश
जबलपुर। वकालत के शुरुआती दौर में आर्थिक चुनौतियों का सामना करने वाले जूनियर अधिवक्ताओं के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश सामने आया है। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल को निर्देश दिए हैं कि जूनियर अधिवक्ताओं को न्यूनतम मासिक स्टाइपेंड उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक गाइडलाइन तैयार की जाए। इसके लिए एमपी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और एमपी हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन से परामर्श करने तथा पूरी प्रक्रिया छह महीने में पूरी करने को कहा गया है।
मामले की सुनवाई रीवा जिले के मनगवां थाना क्षेत्र के ग्राम दुबहाई निवासी विपिन पाण्डेय की याचिका पर हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित जूनियर अधिवक्ता आयुषी मिश्रा से अदालत ने पूछा कि क्या उन्हें अपने कार्य के बदले स्टाइपेंड मिलता है। अधिवक्ता द्वारा स्टाइपेंड नहीं मिलने की जानकारी देने पर अदालत ने जूनियर वकीलों की आर्थिक स्थिति से जुड़े इस पहलू पर गंभीरता से विचार किया।
हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के 15 अक्टूबर 2024 के सर्कुलर का भी उल्लेख किया, जिसमें जूनियर अधिवक्ताओं के लिए न्यूनतम स्टाइपेंड की सिफारिश की गई है। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में 20 हजार रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड की सिफारिश है। हालांकि बीसीआई का यह सर्कुलर सिफारिशी प्रकृति का है।
अदालत ने कहा कि मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल संबंधित बार एसोसिएशनों के साथ विचार-विमर्श कर ऐसी गाइडलाइन तैयार करे, जिससे जूनियर अधिवक्ताओं को न्यूनतम आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू हो सके।
कोर्ट ने संबंधित मामले में जूनियर अधिवक्ता को स्टाइपेंड नहीं दिए जाने के कारणों की जांच करने के निर्देश भी स्टेट बार काउंसिल को दिए हैं। अदालत ने माना कि वकालत के शुरुआती चरण में जूनियर अधिवक्ता आमतौर पर वरिष्ठ वकीलों के साथ काम करते हुए पेशे की बारीकियां सीखते हैं और उनके पास स्वतंत्र आय के सीमित साधन होते हैं। ऐसे में रोजमर्रा के खर्च और आवागमन जैसी जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता महत्वपूर्ण हो सकती है।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब स्टेट बार काउंसिल और संबंधित बार एसोसिएशनों के बीच होने वाली चर्चा पर निगाह रहेगी। छह महीने के भीतर तैयार होने वाली गाइडलाइन से प्रदेश में जूनियर अधिवक्ताओं के लिए न्यूनतम स्टाइपेंड की व्यवस्था का स्वरूप स्पष्ट होगा।

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