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October 11, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

बीमा पॉलिसी के नाम पर 3.60 लाख की धोखाधड़ी मामले पर एजेंट शील चंद जैन पर FIR दर्ज़..!



प्रहलाद गुप्ता  कोतमा/  जिले के कोयलांचल में मेहनतकश कालरी कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई पर कथित ठगी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कभी चिटफंड कंपनियों के नाम पर तो कभी बीमा पॉलिसी का भरोसा दिलाकर रकम लेने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ताजा मामला भालूमाड़ा थाना क्षेत्र का है, जहां बीमा पॉलिसी के नाम पर 3.60 लाख रुपए की कथित धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने बीमा एजेंट शील चंद जैन, निवासी डबल स्टोरी भालूमाड़ा, के विरुद्ध 10 अक्टूबर 2026 को FIR दर्ज कर जांच शुरू की है।

पोड़ी निवासी तेरसू केवट की शिकायत के अनुसार, बीमा कराने और किस्त जमा करने के नाम पर अलग-अलग माध्यमों से रकम दी गई थी। आरोप है कि 50 हजार रुपए सोनम जैन के खाते में, 1.10 लाख रुपए शील चंद जैन की पत्नी सुशीला जैन के खाते में जमा कराए गए, जबकि वर्ष 2014 में 2 लाख रुपए नकद दिए गए।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि पिता की मृत्यु के बाद बीमा पॉलिसी और जमा रकम को लेकर कथित गड़बड़ी सामने आई। रकम वापस मांगने पर बार-बार आश्वासन मिला, लेकिन भुगतान नहीं हुआ।भालूमाड़ा पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 316(2) एवं 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीमा के नाम पर ली गई रकम आखिर कहां गई और वर्षों पुराने इस लेन-देन के पीछे वास्तविक कहानी क्या है।

शील चंद जैन पर पहले भी 18 लाख की कथित ठगी की शिकायत कोतमा थाने हो चुकी –

बीमा एजेंट शील चंद जैन को लेकर यह पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। उपलब्ध शिकायत संबंधी जानकारी के अनुसार, इससे पहले भी एक सेवानिवृत्त SECL कर्मचारी ने उनके विरुद्ध करीब 18 लाख रुपए की कथित धोखाधड़ी की शिकायत कोतमा थाने और पुलिस अधीक्षक अनूपपुर के समक्ष की थी। बताया गया कि शिकायत के बाद संबंधित रकम वापस किए जाने और समझौता होने के चलते उस मामले में FIR दर्ज होने की नौबत नहीं आई थी। हालांकि, इस पुराने प्रकरण के संबंध में शिकायत, भुगतान और समझौते के दस्तावेज चिल्लाचल्ला कर यही कह रहे हैं।

अब एक बार फिर बीमा पॉलिसी के नाम पर रकम लेने का मामला सामने आने के बाद एजेंट की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में कुछ अन्य सेवानिवृत्त कालरी कर्मचारियों के साथ भी कथित तौर पर आर्थिक धोखाधड़ी होने की चर्चाएं हैं। ऐसे मामलों में संबंधित शिकायतों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

कहीं रिश्तेदार का खाता, कहीं धर्मपत्नी का—लेन-देन की कड़ियां जोड़ना पुलिस के लिए चुनौती-

शिकायत में जिन तीन लेन-देन का उल्लेख किया गया है, उनका कुल योग 3 लाख 60 हजार रूपए है। इसमें 50 हजार रुपए सोनम जैन के खाते में, 1 लाख 10 हजार रुपए। अपनी धर्मपत्नी सुशीला जैन के खाते में तथा 2 लाख रुपए नकद दिए जाने का आरोप पीड़ित फरियादी ने शील चंद जैन पर लगाएं है।

अब जांच में बैंक स्टेटमेंट, चेक की प्रतियां, बीमा पॉलिसी के दस्तावेज और नकद भुगतान से जुड़े साक्ष्यों की अहम भूमिका रहेगी। पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि संबंधित खातों में जमा रकम का वास्तविक उद्देश्य क्या था और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया।

शिकायतकर्ता ने सुशीला जैन शासकीय स्वास्थ्य कर्मचारी पसान के बैंक खाते पर पैसे लेने का उल्लेख शिकायत में किया गया है।

भरोसे की पॉलिसी या मेहनत की कमाई पर संकट –

बीमा पॉलिसी आम आदमी और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए भविष्य की सुरक्षा का माध्यम होती है। कालरी कर्मचारी वर्षों तक मेहनत कर जो रकम बचाते हैं, उसे वे परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए निवेश करते हैं। ऐसे में बीमा के नाम पर रकम लेने और भुगतान को लेकर विवाद की शिकायतें सामने आना गंभीर चिंता का विषय है।सवाल सिर्फ 3.60 लाख रुपए का नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी है, जिसके आधार पर लोग अपनी जीवनभर की कमाई किसी एजेंट को सौंप देते हैं।

फिलहाल शील चंद जैन के विरुद्ध FIR दर्ज होने के बाद मामला पुलिस जांच के अधीन है। आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। अब निगाहें भालूमाड़ा पुलिस की जांच पर टिकी हैं कि पुराने लेन-देन के दस्तावेज क्या खुलासा करते हैं और कथित धोखाधड़ी के आरोपों में आगे कौन-से तथ्य सामने आते हैं।

धोखाधड़ी मामले मे एक मंत्री जी के दो चेहरे-

सामने न्याय की हुंकार, पीठ पीछे सिफारिशों का रहस्य…पहले पीड़ित के पक्ष में कार्रवाई का फरमान, फिर कथित


नटवरलाल की पैरवी पर सुर बदलने की चर्चा..? मंत्री दरबार में दलाल की दलील भारी या सच की ताकत..? पुलिस ने सिफारिश पहुंचने से पहले ही धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज कर दी।अब सवाल—पद और चेहरे देखकर फोन उठेगा या सच-झूठ परखकर,, सत्ता की साख बचानी है तो सिफारिश नहीं, सत्य का साथ दीजिए—वरना दोहरे रवैये की चर्चा भरोसे पर भारी पड़ सकती है।

कहना है –

पीड़ित की शिकायत के आधार पर शील चंद जैन के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है,, जांच जारी है।

राधिका भगत

थाना प्रभारी भालूमाड़ा जिला अनूपपुर

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