October 11, 2026
सी टाइम्स
जीवनशैली

12 अक्टूबर का पंचांग:  नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करना फलदाई, सुबह 11:50 से दोपहर 12:36 बजे तक अभिजीत मुहूर्त

नई दिल्ली, हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।

12 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि रात 10:13 बजे तक रहेगी। इसके बाद तृतीया तिथि शुरू हो जाएगी। सोमवार को सुबह 6:26 बजे सूर्योदय और शाम 6:00 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, सुबह 7:43 बजे चंद्रोदय और शाम 6:56 बजे चंद्रास्त होगा।

12 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। इस दिन मां ब्रह्मचारिणी (दुर्गा जी के दूसरे स्वरूप) की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके साथ ही यह दिन सोमवार होने के कारण भगवान शिव और चंद्र दर्शन (आश्विन शुक्ल द्वितीया) के लिए भी शुभ है।

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं या इस नक्षत्र में स्थित होते हैं, तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं। चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जिन्हें सूर्य का मित्र माना जाता है। सूर्य और मंगल के इस मेल से व्यक्ति के भीतर गजब का आत्मविश्वास, साहस, पराक्रम और ऊर्जा बढ़ती है। नौकरीपेशा लोगों के काम की उच्च अधिकारियों द्वारा सराहना होती है। प्रशासन, उच्च पदों या प्रबंधन से जुड़े लोगों को विशेष लाभ, नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकते हैं।

सोमवार को रात 8:31 बजे तक विष्कुम्भ योग रहेगा। वैदिक ज्योतिष में विष्कुम्भ योग पंचांग के 27 नित्य योगों में से पहला योग है। जब आकाश मंडल में सूर्य और चंद्रमा की कुल दूरियों की गणना 0 डिग्री से 13 डिग्री 20 मिनट के बीच होती है, तब यह योग बनता है। इस योग के देवता या अधिष्ठाता भगवान यमराज माने जाते हैं। इस योग को सामान्य रूप से एक अशुभ या बाधा-युक्त योग माना गया है। इसकी पहली 5 घटियों (लगभग 2 घंटे) में कोई भी नया कार्य, विवाह, यात्रा, या गृह प्रवेश शुरू करने से बचा जाता है।

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है। आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवाँ मुहूर्त) होता है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है।

सोमवार को दोपहर 2:33 से शाम 4:14 बजे तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है। यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

इस दिन राहुकाल सुबह 7:53 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है। स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है। इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है।

सोमवार को गुलिक काल दोपहर 1:40 से 3:06 बजे तक रहेगा। गुलिक काल को ‘विषैला समय’ भी कहा जाता है। यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं। इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है। जो काम बार-बार करने हों, वे इस काल में किए जा सकते हैं। बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है।

इस दिन यमगंड काल सुबह 10:46 से दोपहर 12:13 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु, या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए।

सोमवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कामकाज और बौद्धिक क्षमता पर विशेष रूप से पड़ता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी माना जाता है।

इस दिन चंद्रमा तुला राशि में रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा के तुला राशि में होने का मतलब है कि जातक के आंतरिक मन, भावनाओं और स्वभाव पर शुक्र ग्रह और वायु तत्व का गहरा प्रभाव है। ऐसे लोग झगड़े और विवाद से दूर रहना चाहते हैं। ये जीवन के हर पहलू में संतुलन और न्याय की तलाश करते हैं। इनका स्वभाव मिलनसार, विनम्र और कूटनीतिक होता है। ये अपनी मीठी वाणी और समझदारी से दूसरों का दिल आसानी से जीत लेते हैं।

सोमवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।

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