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मेयर इन काउंसिल के विस्तार से पहले वायरल वीडियो ने बदला सियासी समीकरण, कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर भी हलचलजबलपुर। नगर निगम की राजनीति में इन दिनों भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों के भीतर अंदरूनी खींचतान और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की चर्चाएं तेज हैं। बीते दिनों सामने आए दो अलग-अलग घटनाक्रमों को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चाओं के केंद्र में भाजपा में मेयर इन काउंसिल के विस्तार की प्रक्रिया और कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर चल रही उठापटक है। हालांकि, इन घटनाक्रमों के पीछे राजनीतिक साजिश की चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा में वायरल वीडियो से बदले समीकरण
भाजपा में लंबे समय से प्रस्तावित मेयर इन काउंसिल के विस्तार को लेकर संगठन स्तर पर मंथन चल रहा था। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नामों पर विचार-विमर्श अंतिम चरण में पहुंच चुका था। इसी बीच एक भाजपा नेता का पुराना वीडियो वायरल हो गया। बताया जा रहा है कि इस वीडियो में संबंधित नेता के हाथ में बीयर की बोतल दिखाई देने को लेकर विवाद खड़ा हुआ। मेयर इन काउंसिल में जगह पाने के प्रमुख दावेदारों में शामिल इस नेता से जुड़े घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
वीडियो सामने आने के बाद संगठन की प्रतिक्रिया और विस्तार की प्रक्रिया पर इसके संभावित असर को लेकर सवाल उठने लगे। राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि इस घटनाक्रम से कुछ अन्य दावेदारों की संभावनाएं प्रभावित हुई हैं। हालांकि, वीडियो वायरल होने के पीछे किसी नेता की भूमिका होने के दावों की पुष्टि नहीं हुई है।
लीज प्रकरण से कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति गरमाई
दूसरा मामला वर्षों पुराने लीज प्रकरण और अतिक्रमण संबंधी शिकायत से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, डीएन जैन संस्था को दी गई लीज को वर्ष 1992 से निरस्त बताया जा रहा है। इस प्रकरण में दस्तावेजों और लीज से जुड़े कानूनी पहलुओं के आधार पर मामला न्यायालय तक पहुंचा। खबर के मुताबिक, न्यायालय ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी दिए हैं। संबंधित परिसर में एक सक्रिय पार्षद सहित कई परिवार वर्षों से निवासरत बताए जाते हैं।
यह मामला सामने आने के बाद कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में भी हलचल बढ़ने की चर्चाएं हैं। पार्टी के कुछ वरिष्ठ पार्षद नगर निगम में विपक्ष की मौजूदा भूमिका को लेकर असंतोष जताते हुए नेतृत्व में बदलाव की आवश्यकता उठा चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर पहले से चल रही चर्चाओं के बीच इस प्रकरण ने राजनीतिक समीकरणों को और पेचीदा बना दिया है।
बदलाव की मांग तेज होने के आसार
नगर निगम चुनाव की तैयारियों और राजनीतिक गतिविधियों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर संगठनात्मक फैसले लेने का दबाव बढ़ सकता है। पार्टी के भीतर दूसरे दावेदारों द्वारा अपनी स्थिति मजबूत करने और नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठाने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं।
फिलहाल, दोनों दलों के घटनाक्रमों को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर जारी है। इन मामलों में वास्तविकता क्या है और इनके पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की कितनी भूमिका है, यह संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों और उपलब्ध तथ्यों से ही स्पष्ट हो सकेगा।


