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*आर.आई. श्याम सेठ राय और सरोज डोंगरे की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल*
सिवनी (म.प्र.) / बरघाट:
राजस्व प्रशासन की घोर लापरवाही और मनमानी का एक ताजा मामला बरघाट तहसील से सामने आया है, जहाँ आवेदक हर्षित (पिता युगलकिशोर, निवासी ग्राम बरघाट) की भूमि के सीमांकन के नाम पर केवल खानापूर्ति और गुमराह करने का खेल खेला गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रकरण क्रमांक 1592/वसंत.तह./2026 के अंतर्गत दिनांक 01/09/2026 को तहसीलदार महोदय के आदेशानुसार ग्राम बरघाट के पटवारी हल्का नंबर 48, खसरा नंबर 50/41/1 (रकबा 0.045 हेक्टेयर) एवं 50/41/2 (रकबा 0.024 हेक्टेयर) की भूमि के सीमांकन हेतु 5 सदस्यीय एक नई टीम का गठन किया गया था।
इस गठित टीम में दो राजस्व निरीक्षक (आर.आई. श्याम सेठ राय एवं आर.आई. मैडम सरोज डोंगरे) तथा तीन पटवारी (पारस ठाकुर व अन्य) शामिल थे। तय कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 28/09/2026 को टीम स्थल निरीक्षण के लिए मौके पर पहुँची। आवेदक की सबसे बड़ी और मुख्य मांग यह थी कि जमीन का मापन पूरी शुद्धता के साथ आधुनिक ई.टी.एस. (Electronic Total Station) मशीन से किया जाए। लेकिन मौके पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
बिना आधार और बिना निशान के सीमांकन की लीपापोती
जांच प्रतिवेदन और पंचनामा रिपोर्ट के अनुसार, मौके पर पहुँचकर टीम ने सीमांकन के दौरान न तो खेत की मेड को आधार बनाया और न ही सामने की रोड या किसी मुख्य निशान को चिन्हित किया। यहाँ तक कि आवेदक को उसकी स्वयं की जमीन पर निशाना लगाने या समझने के लिए कोई वैध जगह या मार्किंग नहीं दी गई। जब आवेदक ने असंतुष्ट होकर टीम के जिम्मेदार अधिकारियों से बात की, तो अधिकारियों के अजीबोगरीब और गैर-जिम्मेदाराना बयान सामने आए।
बरघाट में पदस्थ आर.आई. मैडम सरोज डोंगरे ने घनी आबादी का हवाला देते हुए ई.टी.एस. के प्रयोग से इंकार कर दिया और यहाँ तक कह दिया कि “बरघाट का चांदा मुनारा ही गुम गया है!” सवाल यह उठता है कि यदि राजस्व का मुख्य चांदा मुनारा ही गायब है, तो यह राजस्व विभाग की कितनी बड़ी विफलता और लापरवाही है। वहीं, टीम के दूसरे जिम्मेदार अधिकारी आर.आई. श्याम सेठ राय का कहना था कि “घनी आबादी में भी ई.टी.एस. का उपयोग हो जाता है, लेकिन हमारी टीम में ई.टी.एस. से मापन करने वाले एक्सपर्ट नहीं थे, जिस कारण यह सीमांकन बिना ई.टी.एस. के किया गया है।” आर.आई. श्याम सेठ राय ने यह भी कहा कि उन्होंने तहसीलदार मैडम को बता दिया है कि वे इस जांच को करने में सक्षम नहीं हैं और दूसरी टीम गठित कर ली जाए, ऐसा कहकर वे अपना पल्ला झाड़ते नजर आए।
*आर.आई. मैडम की अनुपस्थिति और अधिकारियों की टालमटोल*
चौंकाने वाली बात यह है कि पूरी टीम में शामिल बरघाट की आर.आई. मैडम सरोज डोंगरे तो स्थल निरीक्षण के दौरान मौके पर उपस्थित ही नहीं थीं। उनसे पूछने पर वे पल्ला झाड़ते हुए अन्य पटवारियों और दूसरे आर.आई. से बात करने को कह देती हैं। शासन द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों से भागने वाली ऐसी आर.आई. और कामचोर टीम अपने कर्तव्यों का पालन करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है।
*आवेदक को गुमराह करने और अवैध कब्जा दबाने का खेल*
आवेदक का आरोप है कि अवैध रूप से जमीन दबाने वाले लोग इन अधिकारियों को कुछ ना कुछ इनाम स्वरूप देकर इस कार्रवाई को पूर्ण नहीं होने देते। जब भी आवेदक अपनी जमीन का सही माप करवाने की कोशिश करता है, उसे गोल-गोल घुमाकर गुमराह किया जाता है। बार-बार की इस मानसिक प्रताड़ना और गोलमोल जवाबों के कारण आवेदक का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा है और स्वास्थ्य दशा भी तेजी से बिगड़ रही है। यदि ऐसी स्थिति में आवेदक को कोई शारीरिक क्षति होती है, तो इसकी संपूर्ण जवाबदारी इन लापरवाह और कामचोर अधिकारियों की होगी।
*जनता के बीच उठ रही मांग और शासन से गुहार*
बरघाट राजस्व की यह ना अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है। क्या तहसीलदार महोदय (पूजा राणा) इस मामले में संज्ञान लेकर आवेदक की उचित मांगों के अनुसार ई.टी.एस. मशीन से निष्पक्ष और शुद्ध सीमांकन करवाएंगी या फिर आवेदक को यूं ही असंतुष्ट और गुमराह किया जाता रहेगा? आवेदक की स्पष्ट और दो-टूक मांग है कि उसकी जमीन का मापन आधुनिक ई.टी.एस. मशीन से ही किया जाए। शासन और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों से विनम्र निवेदन है कि अपने कर्तव्यों का पालन न करने वाली, झूठी रिपोर्ट देने वाली और जनता को गुमराह करने वाली इस लापरवाह टीम के विरुद्ध सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।


