जनता और जनप्रतिनिधियों का मिल रहा समर्थन, दूसरे जिलों में भी कार्रवाई शुरूजबलपुर। निर्धारित मानकों से अधिक तेज आवाज में बजने वाले डीजे के खिलाफ जबलपुर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई की प्रदेशभर में सराहना हो रही है। जबलपुर में शुरू हुई सख्ती के बाद अन्य जिलों में भी पुलिस ने कानफोड़ू डीजे के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इस अभियान को बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों के स्वास्थ्य तथा आम नागरिकों के शांतिपूर्ण जीवन से जोड़कर देखा जा रहा है।
डीजे के शोर का समर्थन करने वाले कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि कुछ लोगों के मनोरंजन के लिए आसपास रहने वाले हजारों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। तेज आवाज से बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों के आराम और मरीजों की सेहत प्रभावित हो सकती है।
शांति से जीना भी मौलिक अधिकार
संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दूसरों पर जबरन शोर थोपने की अनुमति नहीं देता। ध्वनि प्रदूषण नियमों के अनुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और सार्वजनिक ध्वनि प्रणालियों के उपयोग पर सामान्य प्रतिबंध है। निर्धारित शर्तों के तहत ही विशेष अवसरों पर सीमित छूट दी जा सकती है।
धर्म की आड़ में नियमों की अनदेखी नहीं
डीजे कार्रवाई को धार्मिक रंग देने के बजाय नियमों के पालन पर ध्यान देना जरूरी है। पुलिस की कार्रवाई को जनता और जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिल रहा है। अष्टमी-नवमी के बाद प्रतिमा विसर्जन के दौरान प्रशासन के सामने शांति, सुरक्षा और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण बनाए रखने की चुनौती रहेगी।


