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*नल-जल योजना कागजों में, जमीनी हकीकत में बूंद-बूंद के लिए जद्दोजहद*
उमरिया — पाली विकास खंड की ग्राम पंचायत गिंजरी की पेयजल व्यवस्था पिछले कई महीनों से ठप्प पड़ी है। शासन की नल-जल योजना कागजों में हर घर तक पानी पहुंचाने का दावा करती है, गांव में लाखों की लागत से ऊंची पानी की टंकी भी खड़ी कर दी गई है, लेकिन हकीकत यह है कि पूरा गांव आज भी नदी और हैण्डपम्प के भरोसे जी रहा है।
सुबह की एक तस्वीर इस हकीकत को साफ-साफ बयान कर रही है। हैंडपंप के चारों ओर महिलाओं की कतार लगी है। एक महिला हैंडपंप चला रही है, दूसरी बाल्टी भर रही है, तीसरी बर्तन धो रही है और बाकी महिलाएं अपनी बारी आने का इंतजारकर रही हैं। पीछे कच्चा मैदान, पुराने मकान और सूखा माहौल है, लेकिन महिलाओं का ध्यान सिर्फ एक ही चीज पर है – बूंद-बूंद पानी। एक बाल्टी भरते ही दूसरी बाल्टी के लिए फिर से कतार में लगना पड़ता है। घर तक पानी पहुंचाने के लिए महिलाओं को दिन में कई-कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
इस विडंबना को और गहरा कर देती है। उसी गांव में आसमान की पृष्ठभूमि में एक ऊंची पानी की टंकी खड़ी है। ढांचा तैयार है, पाइप और सीढ़ियां लगी हैं, लेकिन उस टंकी से घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा। नल लगे हैं, पाइपलाइन का दावा है, पर नलों में पानी की एक बूंद भी नहीं आती। नतीजा यह है कि लाखों रुपये की टंकी गांव के बीच शोपीस बनकर रह गई है, और ग्रामीण आज भी हैंडपंप पर निर्भर हैं। एक तरफ टंकी खड़ी है, दूसरी तरफ महिलाएं हैंडपंप से बाल्टी-बाल्टी पानी भरने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या किसी एक मौसम की नहीं है। गर्मी हो या सर्दी, बरसात हो या रबी का सीजन, पेयजल का संकट साल भर बना रहता है। हैंडपंपों पर भीड़ रहती है, कई बार पानी का स्तर नीचे चला जाता है, तो घंटों इंतजार करना पड़ता है। महिलाओं और बच्चों का बड़ा समय पानी भरने में ही बीत जाता है, जिससे पढ़ाई, काम और घर के दूसरे जरूरी काम प्रभावित होते हैं।
अब सवाल यही उठ रहा है कि जब टंकी बन चुकी है और पाइपलाइन बिछाने का दावा किया जा रहा है, तो फिर गिंजरी पंचायत के घरों तक नल से जल क्यों नहीं पहुंच रहा? क्या मेंटेनेंस के अभाव में योजना दम तोड़ रही है, या फिर अधूरे काम को ही पूर्ण बताकर खानापूर्ति कर दी गई? ग्राम पंचायत गिंजरी के ग्रामीणों की अब एक ही मांग है कि पेयजल व्यवस्था की तत्काल जांच कराई जाए, बंद पड़ी टंकी और नल-जल कनेक्शन को चालू किया जाए, ताकि महिलाओं को हैंडपंप की कतार से मुक्ति मिल सके और गांव को सच में हर घर नल, हर घर जल का हक मिल सके।


