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October 25, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

OBC महिला अभ्यर्थी को सामान्य वर्ग में नियुक्ति का हक, हाईकोर्ट ने दिया आदेश



सामान्य महिला से अधिक अंक पाने के बावजूद चयन से हुई थीं वंचित, आयुर्वेद कम्पाउंडर भर्ती मामले में रीवा की संगीता पटेल को राहत
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आयुर्वेद कम्पाउंडर भर्ती से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि आरक्षित वर्ग की महिला अभ्यर्थी यदि सामान्य वर्ग की अंतिम चयनित महिला उम्मीदवार से अधिक अंक प्राप्त करती है और अन्य निर्धारित पात्रताएं पूरी करती है, तो उसे सामान्य श्रेणी में चयन का लाभ दिया जा सकता है। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने रीवा निवासी याचिकाकर्ता संगीता पटेल को राहत देते हुए संबंधित अधिकारियों को उनकी पात्रता की पुष्टि कर नियुक्ति पत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं।
मामला वर्ष 2013 में आयुर्वेद कम्पाउंडर पदों के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया से संबंधित है। मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड ने 24 जनवरी 2013 को भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिला अभ्यर्थी संगीता पटेल ने लिखित परीक्षा में 100 में से 51 अंक प्राप्त किए थे। उनका कहना था कि सामान्य महिला वर्ग की अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक अंक होने के बावजूद उन्हें सामान्य श्रेणी की मेरिट सूची में स्थान नहीं दिया गया। इस संबंध में आयुष संचालनालय के समक्ष प्रस्तुत उनका अभ्यावेदन 29 सितंबर 2015 को खारिज कर दिया गया था।
याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता जय शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट के रामनरेश उर्फ रिंकू कुशवाह बनाम मध्य प्रदेश राज्य और सौरव यादव प्रकरणों में प्रतिपादित कानूनी सिद्धांतों का हवाला दिया। उन्होंने दलील दी कि आरक्षित वर्ग की महिला अभ्यर्थी को केवल उसकी श्रेणी के आधार पर सामान्य वर्ग की मेरिट में स्थान देने से वंचित नहीं किया जा सकता, यदि वह निर्धारित मानदंडों के अनुरूप अधिक अंक प्राप्त करती है।
वहीं, भर्ती बोर्ड की ओर से दलील दी गई कि सभी पद पहले ही भरे जा चुके हैं और कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं है। हालांकि, 23 अक्टूबर को सुनाए गए फैसले में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत प्रदान करते हुए संबंधित अधिकारियों को उनकी पात्रता की पुष्टि कर नियुक्ति देने के निर्देश दिए।
अदालत के आदेश के अनुसार, नियुक्ति आदेश जारी होने की तारीख से उनकी वरिष्ठता, वेतन निर्धारण और अन्य सेवा लाभ निर्धारित किए जाएंगे। हाईकोर्ट का यह फैसला भर्ती प्रक्रिया में मेरिट और आरक्षण संबंधी नियमों के अनुपालन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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