
बीजिंग, 19 जून | द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से अब इस समय पूरा विश्व सबसे गंभीर वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल से गुजर रहा है। इस कोविड-19 ने अब तक 210 से अधिक देशों और क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया है, और दुनिया भर के 8 अरब से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं और 4 लाख से अधिक लोगों की जान चली गई है। लेकिन चीन ने समय-समय पर जाहिर किया है कि वह मानव जाति के लिए साझा भविष्य के साथ एक समुदाय के निर्माण की दृष्टि के लिए खड़ा है।
अभी 17 जून को चीनी राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने कोविड-19 की रोकथाम के लिए अफ्रीकी नेताओं, अफ्रीकी संघ आयोग, संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. ट्रेडोस, और अन्यों के साथ एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की, और एक महत्वपूर्ण भाषण दिया।
इस खास शिखर सम्मेलन में, राष्ट्रपति शी ने पूरे अफ्रीकी महाद्वीप को पूर्ण सहयोग देने का वायदा किया, और कहा कि अफ्रीकी देशों की क्षमता निर्माण में सहायता देने को चीन सर्वोच्च प्राथमिकता मानता है। ऐसा करने के लिए, चीन ने मेडिकल टीमों और आपूर्ति, पर्याप्त वित्तीय सहायता, नए अस्पतालों और सीडीसी मुख्यालय के निर्माण का वचन दिया। इसके अलावा ऋण राहत की भी बात की, साथ ही वैक्सीन के बन जाने पर सबसे पहले अफ्रीकी देशों को दी जाएगी। कहीं न कहीं, शी चिनफिंग की बातों से साफ झलक रहा था कि उन्होंने चीन और अफ्रीका के बीच एक ‘साझा स्वास्थ्य समुदाय’ का वादा किया है।
खैर, सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर शिखर समेमलन हुआ और ऐसे विषय पर हो रहा है, जो आज के समय में पूरी दुनिया का ध्यान केंद्रित है- कोविड-19, लेकिन इस शिखर सम्मेलन को पश्चिमी मीडिया में बहुत कम तरजीह मिली। वैसे सब जानते हैं कि पश्चिमी मीडिया चीन-अफ्रीका संबंधों को नकारात्मक चश्मे से देखने और लगातार विवादों को हवा देने और संबंधों को सवालों के घेरे में रखने के लिए उत्सुक रहती है।
हमें समझना होगा कि अफ्रीका के साथ चीन का संबंध ऐतिहासिक एकजुटता पर आधारित है। साल 1955 में, पूर्व चीनी प्रधानमंत्री झोउ एनलाई ने इंडोनेशिया में बांडुंग सम्मेलन में भाग लिया, जहां स्वतंत्रता और राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों को कायम रखते हुए, आम शांति, समृद्धि और विकास के लिए एक साथ आने के लिए गुट-निरपेक्ष आंदोलन के निर्माण पर मुहर लगाई।
आज कोरोना काल के दौरान चीन अफ्रीका को सहायता देने और उसके साथ काम करने के लिए एक नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। कई अफ्रीकी नेताओं ने वास्तव में सक्रिय रूप से बीजिंग को एक मार्ग के रूप में मान्यता दी है। यकीनन इस शिखर बैठक ने अफ्रीकी महाद्वीप पर चीन के कई राजनयिक संबंधों के लिए नींव तैयार की है।
पिछले महीने विश्व स्वास्थ्य महासभा में, चीनी राष्ट्रपति शी ने कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए विकासशील देशों में आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ मदद करने के लिए दो वर्षों में 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर देने का वायदा किया था। इसके अलावा, चीन ने 30 अफ्रीकी अस्पतालों को साथ जोड़ने के लिए अपने अस्पतालों के लिए एक सहयोग तंत्र स्थापित करने की भी बात कही थी और अफ्रीका सीडीसी मुख्यालय के निर्माण में तेजी लाने में मदद करने का वचन भी दिया था, ताकि अफ्रीकी महाद्वीप अपनी बीमारी की तैयारी और नियंत्रण क्षमता को बढ़ा सके।
इस बैठक के बाद से अफ्रीकी नेताओं ने चीन के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के लिए एक मजबूत संबंध को देखना शुरू कर दिया है। खैर, कई चुनौतियां आ सकती हैं और कुछ क्षेत्रों में बातचीत की आवश्यकता भी हो सकती है, फिर भी यह कहना निर्विवाद है कि चीन-अफ्रीका संबंध मजबूत बने हुए हैं और सुधर रहे हैं। वैसे भी कोरोनावायरस से निपटने के लिए, चीन अपना पैसा लगाने के लिए तैयार है जहां जरूरत है और अफ्रीकी महाद्वीप की चिकित्सा और वित्तीय वसूली में मदद करने का वचन दे चुका है।
(लेखक : , चाइना मीडिया ग्रुप में पत्रकार हैं। साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)


