राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री राज भवन में श्री गुरु तेग बहादुर जी के 401वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में हुए सम्मिलित
लखनऊ 29 Jully (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को राज भवन के गांधी सभागार में गुरु तेग बहादुर जी के 401वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री द्वारा उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के मोबाइल पंजाबी ऐप का शुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम में सिख इतिहास पर होने वाली प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता परीक्षा के लिए प्रकाशित पुस्तक ‘सिक्खी ज्ञानमाला प्रतियोगिता’ तथा पंजाबी अकादमी द्वारा प्रकाशित तथा सरदार नरेन्द्र सिंह मोंगा द्वारा लिखित पुस्तक ‘अनमोल कलमां’ का विमोचन भी राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को सरोपा एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गुरु ग्रन्थ साहिब को अपने सिर पर रखकर आसन पर स्थापित किया। पंज प्यारों द्वारा श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी की अगुवाई की गयी।
इस अवसर पर राज्यपाल जी ने गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 401वीं जयन्ती के अवसर पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वीरता और साहस के प्रतीक सिख धर्म के 9वें गुरु उन निःस्वार्थ शहीदों में से एक थे, जिन्होंने सभी भारतीयों को शान्तिपूर्वक अपने धर्म का पालन करने में मदद की। गुरु तेग बहादुर जी का आदर्श जीवन हम सभी को ईश्वरीय निष्ठा के साथ समता, करुणा, प्रेम, सहानुभूति, त्याग और बलिदान जैसे मानवीय गुणों के लिए प्रेरित करता है। वे जानते थे कि धर्म का मार्ग सत्य का मार्ग है और सत्य की सदैव जीत होती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज भवन मंे गुरु तेग बहादुर जी के 401वें प्रकाश पर्व के आयोजन के लिए राज्यपाल को बधाई देते हुए कहा कि विकास के साथ हमें सतत् रूप से आगे बढ़ना चाहिए। दुनिया की प्रगति से प्रेरित होकर हमें तैयारी करनी चाहिए। इसमें कोई गलत बात नहीं है। आज हम मंगल ग्रह की यात्रा कर रहे हैं। नित नये-नये अनुसंधान हो रहे हैं। इन्टरनेट ऑफ थिंग्स तथा आर्टिफिशियल इन्टेलीजेंस के माध्यम से दुनिया बहुत आगे बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी को यह याद रखना होगा कि इतिहास को विस्मृत कर हम आगे नहीं बढ़ सकते हैं। इतिहास के गौरवशाली क्षण हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख गुरुओं का इतिहास भारत की विजय गाथा को प्रमाणित करता है। गुरु नानक देव जी ने विशुद्ध भक्ति की धारा प्रवाहित की, लेकिन जब देश व समाज को आवश्यकता पड़ी, तो उसे शक्तिपुंज बनने में भी देर नहीं लगी। काशी विश्वनाथ मन्दिर को स्वर्ण मण्डित करने का कार्य महाराजा रणजीत सिंह ने किया था। एक वह धारा थी, जिसने काशी विश्वनाथ मन्दिर को तोड़ा था, तो दूसरी धारा ने उसी मंदिर को स्वर्ण मंडित करके भारत के इतिहास को स्वर्णाक्षरों में लिखा तथा आने वाली पीढ़ी को प्रेेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब व्यक्ति किसी कार्य को धर्म मानता है, तो उसके लिए दावा नहीं करता है, वह एक कर्तव्य मानकर उस पथ पर आगे बढ़ जाता है। महाराजा रणजीत ंिसंह, उनके वंशजों या सिख समाज ने कभी यह दावा नहीं किया कि उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर को स्वर्ण मंडित कराया। गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान कश्मीरी पण्डितों, देश तथा धर्म के लिए था। गुरु तेग बहादुर एक आध्यात्मिक पुंज थे। एक गुरु के रूप में हम सबके लिए आराध्य हैं। उन्होंने अपने देश व धर्म की मर्यादाओं का कभी उल्लंघन नहीं किया। कार्यक्रम के समापन के पश्चात् राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री ने सिख समाज के सदस्यों के साथ जमीन पर बैठकर लंगर में प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर लखनऊ की महापौरसंयुक्ता भाटिया, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के पूर्व अध्यक्ष मनजिन्दर सिंह सिरसा, राष्ट्रीय सिख संगत के अध्यक्ष सरदार गुरु चरन सिंह गिल, राष्ट्रीय महामंत्री अविनाश जायसवाल, उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के उपाध्यक्ष गुरुविन्दर सिंह छाबड़ा, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य परविन्दर सिंह, स्वामी रामेश्वरानन्द सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


