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June 16, 2026
सी टाइम्स
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जबलपुर में जुमला सच होता हुआ नजर आया जब एक पुलिसकर्मी के अवैध ठेला तोड़ने का वीडियो वायरल हुआ।

जबलपुर :- आधी हकीकत आधा फसाना, यह जुमला तो आपने कई बार सुना होगा पर जबलपुर में यह जुमला सच होता हुआ नजर आया जब एक पुलिसकर्मी के अवैध ठेला तोड़ने का वीडियो वायरल हुआ।
अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई अतरंगी कमेंट देखने को मिले। बिना किसी जांच पड़ताल के पुलिस कर्मी को दोषी और क्रूर बता दिया गया।
हालांकि ऐसा नहीं है कि इस पुलिसकर्मी की कोई गलती नहीं थी। एक शराब दुकान के बाजू में अवैध तरीके से शराब पीने की जगह दिलाने वाले व्यक्ति को वार्निंग देने और उसके खिलाफ धारा 151 की कार्यवाही करने की गुस्ताखी इस पुलिसकर्मी ने की थी।
चलिए पहले देखते हैं की वायरल वीडियो में किस प्रकार पुलिसकर्मी ने इस अवैध दुकान को तोड़ा।
विसुअल
देखा आपने! वीडियो के इस पहलू को देखकर तो यही लग रहा है कि एक दुकानदार के व्यापार को पुलिसकर्मी के द्वारा तहस-नहस कर दिया गया, पर अब हम आपको सुनाते हैं इस घटना के पीछे की कहानी।
दरअसल न्याय की गुहार लगाने वाले कथित पीड़ित ने शराब दुकान के ठीक बाजू में एक अवैध दुकान खोल रखी है जिसमें वह पानी के पाउच डिस्पोजल सप्लाई कर वहां पर लोगों को बैठाकर शराब पीने की व्यवस्था करता है। इस कथित पीड़ित का क्षेत्र में अच्छा खासा दबदबा है क्योंकि इसके नाम पर कई मामले दर्ज हैं और कथित आरोपी पुलिसकर्मी के द्वारा इस पर धारा 151 के तहत कार्यवाही की गई । लेकिन यह कार्यवाही इन कथित पीड़ितों को इतनी नागवार ग़ुज़री की इन्होंने एक दिन मौका पाकर इस पुलिसकर्मी की बाइक को ही घेर लिया और उसे गलत जगह पर पार्क होने का आरोप लगाते हुए पुलिसकर्मी को धमकाया, जैसे-तैसे कर यह पुलिस कर्मी वहां से निकला,
विसुअल
पर उसके बाद भी इस कथित आरोपी पुलिसकर्मी ने अपना आपा नहीं खोया, कथित पीड़ितों को केवल समझाइश दी कि वह यहां पर इस अवैध दुकान को हटा लें, पर उसके बाद भी भीड़ तंत्र का हिस्सा बने यह कथित पीड़ित पुलिस कर्मी को धमकाने से बाज़ नहीं आए, और ह्यूमन नेचर या कहे मानवीय व्यक्तित्व का प्रभाव इस पुलिसकर्मी पर भी पड़ा , यह पुलिसकर्मी उस दुकान पर पहुंचा और इस अवैध दुकान या कहे मात्र एक टेबल में सजी दुकान को लात मार कर गिरा दिया। और इसके विरोध में यह लोग पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच गए और वहां पर इन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिसकर्मी पर ही रुपए वसूलने का आरोप लगा दिया। जिसका कोई भी साक्ष्य अब तक उपलब्ध नहीं है।
अब इस घटना में कथित आरोपी पुलिसकर्मी दोषी है या कथित पीड़ित दुकान संचालक यह तो जांच के बाद ही सामने आएगा, पर मात्र एक पक्ष देखकर अपनी राय बना लेना और उस राय को ही सच मानकर सनसनीखेज खबर बना देना क्या न्याययोचित है ? यह फैसला हम आप पर छोड़ते हैं। आपको इस घटना में कौन सही और कौन गलत लगता है कमेंट कर जरूर बताएं।

जबलपुर से वाजिद खान की रिपोर्ट

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