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September 12, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

असम के लिए बड़ी उपलब्धि, मानस नेशनल पार्क में तीन साल से जीरो पोचिंग

16 जून,असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को घोषणा की कि मानस नेशनल पार्क में लगातार तीन वर्षों से गैंडे और बाघ के शिकार (पोचिंग) का एक भी मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने इसे राज्य के वन्यजीव संरक्षण अभियान की बड़ी सफलता बताया।सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह उपलब्धि अम की समृद्ध जैव विविधता की रक्षा और वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, “मानस नेशनल पार्क में लगातार तीन साल से गैंडे और बाघ की शून्य शिकार की घटनाएं दर्ज हुई हैं। एक समय था जब शिकार की घटनाएं सुर्खियों में रहती थीं, लेकिन अब ‘जीरो पोचिंग’ नया सामान्य बन गया है। यह असम के वन्यजीव संरक्षण के लिए किए गए लगातार प्रयासों का परिणाम है।”मानस नेशनल पार्क, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है, भारत के सबसे महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यहां एक सींग वाले गैंडे, रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, जंगली भैंसा और कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं।यह पार्क कभी शिकार और उग्रवाद से जुड़ी गतिविधियों के कारण गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा था, लेकिन पिछले एक दशक में यहां संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह सफलता एंटी-पोचिंग ऑपरेशन को मजबूत करने, वनकर्मियों की तैनाती बढ़ाने, आधुनिक निगरानी तकनीकों के इस्तेमाल, खुफिया आधारित कार्रवाई और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी की वजह से संभव हुई है।वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मानस में गैंडे और बाघों की संख्या में सुधार भारत की सबसे बड़ी संरक्षण सफलताओं में से एक है। इंडियन राइनो विजन कार्यक्रम के तहत गैंडों के पुनर्वास और लगातार आवास संरक्षण ने पार्क की पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई है।राज्य सरकार लंबे समय से वन्यजीव अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए हुए है, खासतौर पर भारतीय एक सींग वाले गैंडे और बाघ जैसे प्रमुख वन्यजीवों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

वन विभाग, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय ने भी शिकार की घटनाओं पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।इस नई उपलब्धि से असम की पहचान वन्यजीव संरक्षण और ईको-टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत होने की उम्मीद है, साथ ही राज्य की वैश्विक प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के प्रयासों को भी नई मजबूती मिलेगी।

 

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