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July 30, 2026
सी टाइम्स
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सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट के बाद ईशा फाउंडेशन के खिलाफ मामला बंद किया

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर। तमिलनाडु पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक रिपोर्ट में कहा है कि पिछले कुछ साल में ईशा योग केंद्र से संबंधित कुछ लोगों के लापता होने की शिकायतें दर्ज की गई थीं, लेकिन जांच में पता चला है कि केंद्र से लापता हुए छह लोगों में से पांच मिल गए हैं। तमिलनाडु पुलिस ने उम्मीद जताई है कि एक लापता व्यक्ति भी जल्द ही मिल जाएगा। पुलिस ने यह भी कहा कि केंद्र में रहने वाले लोग अपनी मर्जी से ऐसा कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट के बाद ईशा फाउंडेशन के खिलाफ मामला बंद कर दिया। यह मामला एक पिता की शिकायत पर आधारित था कि जिसने आरोप लगाया था कि उसकी दो बेटियों को सद्गुरु के कोयंबटूर आश्रम जोड़ने के लिए “ब्रेनवॉश” किया गया था और उन्हें अपने परिवार से संपर्क करने से रोका जा रहा था। मुख्य न्यायाधीश डी.वा.ई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि दोनों बेटियां गीता (27) और लता (24) वयस्क थीं और आश्रम में अपनी मर्जी से रही थीं। वे पहले ही हाईकोर्ट में पेश हो चुकी थीं, इसलिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का उद्देश्य पूरा हो गया है और इस पर आगे कोई कार्रवाई जरूरी नहीं है। ईशा फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “हमें लापता व्यक्ति की सुरक्षित वापसी की उम्मीद है। हम लापता व्यक्ति का पता लगाने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” बाल उत्पीड़न के आरोपों के बारे में फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि आरोपी डॉक्टर ईशा आउटरीच का कर्मचारी था, आश्रम का नहीं। ईशा फाउंडेशन के बयान के अनुसार, “घटना आश्रम परिसर के बाहर हुई और हम जांच में अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं।” फाउंडेशन ने आश्रम के अंदर श्मशान होने की अफवाहों को भी खारिज किया और इसके अस्तित्व को सिरे से नकार दिया। फाउंडेशन ने कहा, “ईशा फाउंडेशन दुनिया भर के साधकों के लिए एक सुरक्षित स्थान है। भारत और दुनिया भर के विभिन्न हिस्सों से लोग यहां बिना किसी प्रतिबंध के रहते हैं। हाल ही में तमिलनाडु पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को जो स्टेटस रिपोर्ट दी है, उसमें पुष्टि की गई है कि दोनों महिला साधिकाएं अपनी मर्जी से आश्रम में रह रही हैं। वास्तव में, उनमें से एक ने हाल ही में 10 किलोमीटर की मैराथन में हिस्सा लिया था।” फाउंडेशन ने सद्गुरु द्वारा दिए गए यौगिक साधनों के माध्यम से मानव कल्याण को बढ़ावा देने के अपने मिशन की पुष्टि की और योग की परिवर्तनकारी शक्ति का अनुभव करने के लिए दुनिया भर के साधकों को आमंत्रित किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, सद्गुरु ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट को दुर्भावनापूर्ण इरादे से दायर की गई तुच्छ याचिकाओं पर अपना बहुमूल्य समय बर्बाद करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि अनगिनत वास्तविक मामलों पर न्यायालय को ध्यान देने की आवश्यकता है। अब समय आ गया है कि हम लोकतंत्र के विशेषाधिकारों का अधिक जिम्मेदारी से उपयोग करें

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