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May 30, 2026
सी टाइम्स
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मध्य प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व बना रातापानी : 90+ बाघ और अंतरराष्ट्रीय पहचान

मध्य प्रदेश, जिसे ‘टाइगर स्टेट’ के नाम से जाना जाता है, ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश का 9वां टाइगर रिज़र्व, रातापानी, आधिकारिक रूप से घोषित कर दिया गया है। इस टाइगर रिज़र्व के निर्माण से न केवल पर्यावरणीय संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएगा।

रातापानी टाइगर रिजर्व की विशेषताएं

रातापानी टाइगर रिजर्व का विस्तार कुल 1271.465 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है, जिसमें कोर एरिया 763.812 वर्ग किलोमीटर और बफर एरिया 507.653 वर्ग किलोमीटर शामिल है। यह अभ्यारण्य भोपाल के समीप स्थित है।और रायसेन व सीहोर जिलों में फैला हुआ है।

इस टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में 9 गांव शामिल हैं :-

झिरी बहेड़ा

जावरा मलखार

देलावाड़ी

सुरई ढाबा

पांझिर

कैरी चौका

दांतखो

साजौली

जैतपुर

इन गांवों का कुल रकबा 26.947 वर्ग किलोमीटर है। हालांकि, इन गांवों को कोर क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया है, जिससे ग्रामीणों के वर्तमान अधिकार अप्रभावित रहेंगे।

90+ बाघों का आशियाना

रातापानी पहले से ही वन्यजीवों की विविधता के लिए प्रसिद्ध है। वर्तमान में यहां 90 से अधिक बाघ पाए जाते हैं, जो इसे बाघों का सुरक्षित आश्रय स्थल बनाते हैं।

पर्यटन और रोजगार के अवसर

भोपाल के पास स्थित होने के कारण रातापानी टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय समुदायों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व्स की सूची

कान्हा टाइगर रिजर्व

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व

संजय दुबरी टाइगर रिजर्व

पेंच टाइगर रिजर्व

नौरादेही टाइगर रिजर्व

माधव टाइगर रिजर्व

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व

पन्ना टाइगर रिजर्व

रातापानी टाइगर रिजर्व

17 साल का इंतजार हुआ खत्म

लगभग 17 वर्षों के इंतजार के बाद रातापानी को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला है। इससे पहले, 2 दिसंबर को माधव नेशनल पार्क को भी टाइगर रिजर्व घोषित किया गया अब मध्य प्रदेश में टाइगर रिजर्व की संख्या 7 से बढ़कर 9 हो गई है।

बाघों की बढ़ती संख्या और संरक्षण की दिशा

मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2022 की गणना के अनुसार प्रदेश में कुल 785 बाघ हैं, जो 2018 में 526 थे। यह वृद्धि वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

अंतरराष्ट्रीय पहचान और संरक्षण का प्रभाव

रातापानी टाइगर रिजर्व का गठन भारत सरकार के राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से प्राप्त बजट और संसाधनों के प्रबंधन को बेहतर बनाएगा। यह क्षेत्र न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि मध्य प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी दिलाएगा।

निष्कर्ष

रातापानी टाइगर रिजर्व का निर्माण मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह टाइगर रिजर्व न केवल बाघों और अन्य वन्यजीवों के लिए सुरक्षित निवास प्रदान करेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी सामाजिक और आर्थिक रूप से लाभान्वित करेगा।

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