Jabalpur News Today। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा विश्व के अनेक देशों पर लगाए गए टैरिफ के बाद उपजी स्थिति पर चिंतन करने भारतीय एग्रो इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के बैनर तले कृषि वैज्ञानिक, कृषि अर्थशास्त्रीयों व विषय विशेषज्ञों ने चिंतन किया। जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के सॉइल साइंस कॉन्फ्रेंस हाल में आयोजित संगोष्ठी में अपनी बात रखते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ पीके मिश्रा ने विस्तृत चर्चा में कहा कि भारत का कृषि क्षेत्र स्थायी है। कोरोना जैसी महामारी के समय भी न केवल हमने अपनी खाद्यान्न आवश्यकता को पूरा किया बल्कि वसुधैव कुटुंब के भाव के साथ विश्व के अन्य देशों को भी खाद्यान्न का निर्यात किया। श्री मिश्रा ने कहा कि वैश्विक मंदी के दौर में भारत को घबराने की आवश्यकता नहीं है। भारत चुनौतियों में भी अवसर तलाश कर कीर्तिमान बनाने वाला देश है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारतीय एग्रो इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रमोद चौधरी ने कहा कि टैरिफ के माध्यम से अमेरिका भारत के कृषि बाजार में घुसकर कब्जाने की जुगत में हैं। भारत को कड़े निर्णय के साथ अमेरिका के सामने झुकने की जरूरत नहीं है। श्री चौधरी ने फसल विविधीकरण, डब्ल्यूटीओ समझौतों, इनपुट सब्सिडी आदि विषयों पर भी चर्चा की।
इससे पूर्व संगोष्ठी का शुभारंभ जेएनकेवी के कुलगुरु डॉ पीके मिश्रा, बीईएआरसी के अध्यक्ष व प्रधानमंत्री एमएसपी कमेटी के सदस्य प्रमोद चौधरी, किसान संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल व प्रांत संगठन मंत्री भरत पटेल ने सरस्वती माता के पूजन व दीप प्रज्वलन कर किया। संगोष्ठी में उपस्थित मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन व कृषि अर्थशास्त्री डॉ ब्यौहार ने आयात निर्यात नीति पर अपने विचार रखते हुए कहा कि अमेरिका के टैरिफ लगाने के बावजूद भी भारत में निवेश बढ़ने की संभावना है।
वैश्विक परिदृश्य में भारत में व्यापार के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं। जिसका लाभ भारत को मिलेगा और भारत की अर्थव्यवस्था विश्व में सिरमौर होगी। डायरेक्टर रिसर्च डॉ जी के कौतु ने कहा कि कृषि शोध कार्य से हम नई नई किस्में पैदा कर खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बने है और हम अब उच्च पोषणयुक्त किस्मों के उत्पादन की दिशा में अग्रसर हैं। किनोवा जैसे सुपर फूड कहे जाने वाली फसलें भी भारत में पैदा हो रहीं हैं जिनकी वैश्विक मांग जोरो पर हैं। आजीविका सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा व पर्यावरण सुरक्षा, आईटी, रसायन, व्यापार नीति आदि पर विभिन्न कृषि वैज्ञानिकों में डॉ दीपक राठी, कमल यादव, प्रदीप कुमार, भरत पटेल, मोहन सिंह, ब्रजेश दीक्षित आदि ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर संगोष्ठी में डॉ आशीष, डॉ राधेश्याम शर्मा, डा चंद्रशेखर पांडे, डॉ शुभम् पटेल, डॉ हितेंद्र राय, डॉ आर एस रघुवंशी, डॉ मनोज कुमार, डॉ शैलेश कुमार, डा आलोक कुमार शर्मा आदि की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन डायरेक्टर एकेडमिक डॉ अभिषेक शुक्ला ने किया।


