September 7, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

जबलपुर – कैसे पाकिस्तानी सैनिकों को था मारा, कैप्टन बसूर ने सुनाई 1965 के युद्ध की दास्तां ,बताया क्या है पहले और अब की लड़ाई में फर्क

Jabalpur News Today। इस समय भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चल रहा है। देश में अलर्ट भी जारी किया गया है. इन हालातों ने कुछ पुरानी यादें ताजा कर दी। 1965 में भी बिल्कुल आज की ही तरह भारत और पाकिस्तान के बीच में कश्मीर को लेकर युद्ध हुआ था। 1965 के युद्ध में जबलपुर के कैप्टन टीएस बसूर ने राजौरी के पास मोर्चा संभाला था, वह बताते हैं कि उन्होंने तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मार डाला था और एक कैप्टन को जिंदा पकड़ा था, जो बाद में पाकिस्तान का बड़ा कमांडर बना।
भारत-पाकिस्तान लड़ाई में कैप्टन बसूर ने लिया था हिस्सा

जबलपुर के निवासी 85 साल के कैप्टन टीएस बसूर यह बात एक निजी चैनल से चर्चा करते हुए कही। कैप्टन बसूर वन गोरखा रेजीमेंट में कैप्टन थे। उन्होंने भारत पाकिस्तान के बीच 1965 की लड़ाई में हिस्सा लिया था। कैप्टन टीएस बसूर बताते हैं कि “उन दिनों उनकी पोस्टिंग राजौरी में थी। उनकी रेजीमेंट को रात में जानकारी मिली कि पाकिस्तान सेना के जवान हमारी बॉर्डर में घुस गए हैं। पाकिस्तान सेना ने कश्मीर के मनानी गांव में अखनूर ब्रिज पर कब्जा कर लिया था। मेरे पास उस समय कुल 11 सैनिक थे। हमारी आमने-सामने की लड़ाई हुई।

बताई 1965 के युद्ध की कहानी

उनके पास लाइटगन मशीन थी, हमारे पास छोटी बंदूके थी. मेरी टुकड़ी के 8 सैनिकों की जान चली गई थी, मैं और मेरा एक घायल हवलदार रामप्रकाश पाकिस्तानी सैनिकों से लड़ रहे थे। जब 8 जवान मारे गए तो, मुझे लगा कि अब लड़ाई कठिन हो गई है। हमें तुरंत दूसरी कोई मदद नहीं मिल सकती थी, इसलिए मैं थोड़े से पीछे हटा और मशीनगन संभाली। मशीनगन के सहारे मैंने तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मार डाला। इन लोगों के पास में लाइट मशीनगन थी। इसके साथ ही उनके कप्तान मोहम्मद अफजल बैग को जिंदा पकड़ा। मोहम्मद अफजाल बाद में जाकर उनका आर्मी कमांडर बना।

हवलदार रामप्रसाद को मिला था वीर चक्र

कैप्टन बसूर ने बताया कि इस लड़ाई में हवलदार राम प्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गए थे। समय हमारे अधिकारी एक ऑस्ट्रेलियाई अंग्रेज हुआ करते थे। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं तुम्हारे लिए वीर चक्र देने की अनुशंसा करूंगा, लेकिन मुझसे ज्यादा जरूरत मेरे हवलदार को थी. इसलिए मैंने उनसे कहा कि वीर चक्र रामप्रकाश को मिलना चाहिए। इससे उसकी ज्यादा मदद हो सकेगी। बाद में रामप्रसाद को वीर चक्र मिला।”

पहले और अब के युद्ध में फर्क

कैप्टन टीएस बसूर बताते हैं कि “उस जमाने के युद्ध और आज के युद्ध में बहुत फर्क है। पहले युद्ध आमने-सामने की लड़ाई थी। हमें लड़ते-लड़ते कई बार खंजर निकालना पढ़ता था। उस लड़ाई में ज्यादा खतरा था, ज्यादा लोगों की जान जाती थी। आज की लड़ाई उस समय की लड़ाई से बहुत अलग है। आज के सैनिक के पास ज्यादा जानकारी होती है। आधुनिक हथियार होते हैं। इसके साथ ही अब जो लड़ाइयां हैं, वह ड्रोन और हवाई हथियारों के माध्यम से लड़ी जा रही है।
टीएस बसूर का कहना है कि “भारतीय फौज अभी भी उन्हें अलग-अलग कार्यक्रमों में बुलाती है और सम्मान देती है। उनके नाम से कई ट्राफियां हैं। उनकी भारत के सेन अधिकारियों से बातचीत भी होती है। हमारी फौज बहुत मजबूत है, न केवल सेना का मनोबल ऊंचा है, बल्कि अब हमारे पास लड़ने के आधुनिक हथियार भी हैं, इसलिए पाकिस्तान हमारे सामने बहुत बौना साबित होगा

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