गुजरात के अहमदाबाद के हाथीजण इलाके में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना में चार महीने की एक मासूम बच्ची को एक पालतू रॉटवाइलर कुत्ते ने नोच-नोचकर मार डाला।
एक अधिकारी के अनुसार, यह दर्दनाक घटना राधे रेसिडेंसी में उस समय हुई जब रॉटवाइलर ने अपनी जंजीर छुड़ा ली और हीना चौहान पर झपट पड़ा, जो अपनी भांजी ऋषिका को गोद में लिए बैठी थीं।
कुत्ता बच्ची को छीनकर ले गया और गंभीर रूप से घायल कर दिया, जब तक कि आस-पास के लोग हस्तक्षेप कर पाते। बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हीना चौहान को भी चोटें आई हैं और उनका एलजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
इस भयावह हादसे का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे जनता में भारी आक्रोश फैल गया है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह कुत्ता पहले भी कई बार आक्रामक व्यवहार कर चुका है और समाज के अन्य लोगों पर हमला कर चुका है। उन्होंने कुत्ते के मालिक दिलीपभाई पटेल के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए विवेकानंदनगर पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के समय पटेल फोन पर व्यस्त थे, तभी कुत्ता जंजीर छुड़ाकर महिला और बच्चे पर टूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने पहले भी कुत्ते के व्यवहार को लेकर पटेल को चेतावनी दी थी, लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। बताया गया कि इसी रॉटवाइलर ने इससे पहले भी हीना चौहान को काटा था और कम से कम तीन अन्य लोगों को घायल किया था।
अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने पुष्टि की है कि यह रॉटवाइलर नगर निगम में पंजीकृत नहीं था, जबकि यह पालतू जानवरों के लिए अनिवार्य है।
मंगलवार को एएमसी अधिकारियों ने पुलिस और पशु चिकित्सक टीम के साथ पटेल के घर का दौरा किया, लेकिन घर बंद मिला। बाद में कुत्ते को मेमनगर इलाके में ट्रेस किया गया, जहां से उसे हिरासत में लेकर नगर निगम के शेल्टर में भेज दिया गया।
कुत्ते के मालिक के खिलाफ पालतू जानवर का पंजीकरण न कराने और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
एएमसी अधिकारियों ने कहा कि यह घटना जिम्मेदार पालतू पशुपालन और खतरनाक नस्लों से जुड़े नगर नियमों का कड़ाई से पालन कराने की सख्त आवश्यकता को उजागर करती है। अहमदाबाद में हाल के वर्षों में पालतू और आवारा कुत्तों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी गई है।
शहर में आवारा कुत्तों की अनुमानित संख्या तीन लाख से अधिक है, जिसका कारण शहरी विस्तार, नसबंदी की कमी और सार्वजनिक स्थलों पर भोजन की उपलब्धता है। ये कुत्ते अक्सर रिहायशी कॉलोनियों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों में घूमते रहते हैं, जिससे खासकर डॉग बाइट और रेबीज जैसे मामलों को लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर खतरा बना रहता है।
हालांकि, अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने ‘एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी)’ कार्यक्रम के तहत नसबंदी और टीकाकरण अभियान शुरू किए हैं, लेकिन सीमित संसाधनों, अनियमित क्रियान्वयन और एनजीओ के साथ समन्वय की कमी के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं।


