यह कहानी जितनी अविश्वसनीय लगती है, उतनी ही चौंकाने वाली और गंभीर है।मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में एक चौंकाने वाला “सांप घोटाला” सामने आया है, जिसने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी रिकॉर्ड में सर्पदंश और अन्य प्राकृतिक कारणों से हुई मौतों के नाम पर फर्जी मुआवजा वसूलने का यह मामला न केवल हैरान करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार जनहित की योजनाओं को भ्रष्ट अधिकारियों ने निजी लाभ के लिए हथियार बना लिया है।
घोटाले की मुख्य बातें:
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला 2019 से 2022 के बीच मध्यप्रदेश के सिवनी जिले की केवलारी तहसील में एक बड़ा घोटाला सामने आया, जिसमें लगभग ₹11.26 करोड़ की राशि का दुरुपयोग किया गया। इस घोटाले का मुख्य आरोपी क्लर्क सचिन दहायत है, जिसने सरकारी राहत राशि प्राप्त करने के लिए 47 अलग-अलग लोगों के नाम पर कुल 279 बार फर्जी “मृत्यु” दर्शाई। इन फर्जी मौतों में सांप के काटने, पानी में डूबने और आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदाओं को कारण बताया गया। हैरानी की बात यह है कि कुछ व्यक्तियों को कई बार “मृत” दिखाया गया – जैसे द्वारका बाई को 29 बार और श्रीराम को 28 बार। प्रत्येक कथित मृत्यु पर परिजनों को ₹4 लाख की राहत राशि मंजूर की जाती थी, जिसे आरोपी ने फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए हथिया लिया। यह घोटाला सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है। जानकारी के मुताबिक जब गांव जाकर जब पूछताछ की गई इस नाम की कोई भी महिला नहीं थी |
यह कैसे संभव हुआ?
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मृत घोषित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज जैसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र तक उपलब्ध नहीं कराए गए।
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घोटालेबाजों ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में पैसा ट्रांसफर करवाया।
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यह सब सरकारी सिस्टम और रिकॉर्ड्स में हेरफेर कर के किया गया।
प्रशासनिक कार्रवाई:
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क्लर्क सचिन दहायत को बर्खास्त कर दिया गया। और गिरफ़्तार कर लिया गया है
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37 आरोपी बनाए गए, जिनमें से 21 की गिरफ्तारी हो चुकी है।
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वित्त विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई जारी है।
क्या यह घोटाला सिर्फ एक व्यक्ति ने किया?
नहीं। इस स्तर का घोटाला अकेले संभव नहीं होता। इसमें सरकारी मशीनरी के कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका है—चाहे वह पटवारी हो, तहसीलदार, बैंक अधिकारी या पंचायत कर्मचारी।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में ऐसे भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं, जो न तो कभी किसी ने देखे हैं और न ही सुने हैं। उन्होंने सिवनी जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एक व्यक्ति को रिकॉर्ड 38 बार सांप ने काट लिया, और हर बार उसे सांप काटने पर मिलने वाली ₹4 लाख की राहत राशि दी गई। यह दर्शाता है कि किस तरह योजनाबद्ध तरीके से फर्जीवाड़ा कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। पटवारी ने यह भी सवाल उठाया कि जब अकेले सिवनी जिले में ₹11 करोड़ का घोटाला हो सकता है, तो पूरे राज्य की स्थिति कितनी भयावह हो सकती है?


