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September 12, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

पत्नी को तलाक का नोटिस भेजना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं : केरल हाईकोर्ट

Centre notifies appointment of Justice C.S. Sudha as Permanent Judge of Kerala HC

केरल हाईकोर्ट ने एक ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया है जिसमें एक पति पर अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप जोड़ा गया था। पत्नी ने तब आत्महत्या कर ली थी जब उसे एक ड्राफ्ट तलाक समझौता सौंपा गया था।

मृतक महिला के माता-पिता और भाई ने बताया कि पति के परिवार के सदस्य उनके घर आए और ड्राफ्ट तलाक समझौता महिला के भाई को सौंपा, जिसने बाद में उसे अपनी बहन को दे दिया।

महिला ने जब उसे पढ़ा, तो वह मानसिक रूप से टूट गई और कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली।

हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप यह है कि पति के परिवार वालों ने मृतका के घर जाकर तलाक समझौते का मसौदा सौंपा और इसे देखकर महिला मानसिक रूप से आहत हुई। ट्रायल कोर्ट ने माना कि इस मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने के पर्याप्त साक्ष्य हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने इस निष्कर्ष से असहमति जताई।

हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपों में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह सिद्ध हो कि पति ने आत्महत्या के लिए कोई उकसावा दिया हो, जानबूझकर मदद की हो, या प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से किसी प्रकार की प्रेरणा दी हो।

“धारा 306 आईपीसी (या भारत न्याय संहिता की धारा 108) के अंतर्गत आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध को सिद्ध करने के लिए यह आवश्यक है कि अभियुक्त ने या तो उकसाया हो, साजिश रची हो, जानबूझकर मदद की हो, या किसी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रेरणा दी हो। मात्र अपमान, उत्पीड़न या धमकी का आरोप, बिना किसी उकसावे के, इस अपराध के लिए पर्याप्त नहीं है,” हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी बताया कि मृतका के परिवार ने यह नहीं कहा कि पति ने आत्महत्या के लिए उकसाने या उसमें सहायता करने में कोई सक्रिय भूमिका निभाई हो। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया गया।

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