मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को घोषणा की कि राज्य सरकार 2025 के अंत तक सभी सरकारी भवनों पर सोलर रूफटॉप लगाने की योजना बना रही है। यह कदम राज्य में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा विभाग का लक्ष्य है कि आगामी समय में 32 लाख नए बिजली कनेक्शन दिए जाएं, जिससे आम नागरिकों को राहत मिल सके।
इस समय राज्य में 30 लाख किसानों को स्थायी बिजली कनेक्शन प्राप्त हैं, जबकि 2 लाख से अधिक किसान अस्थायी कनेक्शन पर निर्भर हैं।
मुख्यमंत्री यादव ने यह बातें भोपाल में आयोजित ‘सूर्य मित्र कृषि फीडर समिट’ में कहीं। उन्होंने कहा कि किसानों के बिजली बिलों को धीरे-धीरे खत्म किया जाएगा और सब्सिडी पर खर्च हो रहे हजारों करोड़ रुपये को विकास कार्यों में लगाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि दिल्ली मेट्रो अब सौर ऊर्जा से संचालित हो रही है, जिससे यह साफ होता है कि नवीकरणीय ऊर्जा का महत्व तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि निवेश का तरीका भी बदल रहा है — जहां पहले निवेशक 1.05 करोड़ की सब्सिडी पर निर्भर थे, अब वे 85 लाख रुपये निवेश कर रहे हैं और बिना सब्सिडी के सौर परियोजनाओं में भाग ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि:
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मोहासा-बाबई (नर्मदापुरम) में 18,000 करोड़ रुपये के निवेश से 22 सोलर यूनिट्स लगाई जा रही हैं।
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सांची को राज्य का पहला सौर शहर घोषित किया गया है।
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ओंकारेश्वर का फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट और रीवा की मेगा सोलर परियोजना राज्य की बड़ी उपलब्धियां हैं।
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9300 मेगावॉट से अधिक की सौर परियोजनाएं वर्तमान में क्रियाशील हैं।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि मध्य प्रदेश अन्य राज्यों की तरह सिर्फ बड़े निवेशकों पर निर्भर नहीं है, बल्कि किसानों और छोटे निवेशकों को भी ऊर्जा उत्पादन में भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि:
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1 मेगावाट सौर परियोजना के लिए 1.05 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है।
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कई निवेशक बिना सब्सिडी के भी इस योजना में भाग ले रहे हैं।
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‘सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना’ के माध्यम से किसानों को दिन में सस्ती बिजली दी जाएगी और कोयला आधारित ऊर्जा पर निर्भरता घटेगी।
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योजना के अंतर्गत बोली के माध्यम से परियोजनाएं आवंटित की जाएंगी, जिसमें निवेशक और किसान दोनों भाग ले सकते हैं।
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राज्य में 1,900 से अधिक उपकेंद्रों पर 14,500 मेगावाट की विद्युत क्षमता उपलब्ध है।
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एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत सोलर परियोजनाओं को 7 साल के लिए 3% ब्याज छूट भी दी जा रही है।


