एक दुखद घटना में राजस्थान के पूर्व भाजपा सांसद महावीर भगोरा के 40 वर्षीय पुत्र आशीष भगोरा का शव शनिवार सुबह उदयपुर में संदिग्ध हालात में मिला। आशीष उदयपुर के अंबामाता थाना क्षेत्र में जय अम्बे डेयरी के ऊपर 24 घंटे संचालित एक सार्वजनिक पुस्तकालय चलाते थे।
पुलिस के अनुसार, सुबह करीब 7:15 बजे कुछ छात्र पुस्तकालय पहुंचे और आशीष को कई बार आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब वे उनके कमरे में गए, तो उन्हें फर्श पर अचेत अवस्था में पड़ा पाया गया। पंखे से एक गमछा लटका हुआ था, जिससे प्रथम दृष्टया आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है। शव को महाराणा भूपाल शासकीय अस्पताल (एमबीजीएच) के मुर्दाघर में पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है।
अंबामाता थानाधिकारी मुकेश सोनी ने पुष्टि की कि आशीष, मल्लातलाई स्थित एकलव्य कॉलोनी के निवासी थे और प्रारंभिक जांच में यह आत्महत्या का मामला लग रहा है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
आशीष अपने शैक्षणिक योगदान और आदिवासी क्षेत्रों में सामाजिक कार्य के लिए विशेष रूप से पहचाने जाते थे। शिक्षा के प्रति उनकी निष्ठा और जनहित के रचनात्मक प्रयासों की सराहना होती रही है।
घटना की सूचना मिलते ही भाजपा के उदयपुर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ और वरिष्ठ नेता प्रमोद समर मौके पर पहुंचे। राठौड़ ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, “आशीष एक प्रतिभाशाली और सामाजिक रूप से समर्पित व्यक्ति थे। यह बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाली घटना है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।”
आशीष के पिता महावीर भगोरा, जो चार वर्ष पूर्व निधन हो गया था, भाजपा के वरिष्ठ नेता थे। वे विधायक, राज्य मंत्री और बाद में सलूम्बर से सांसद भी रहे। समाज कल्याण विभाग में उप निदेशक के रूप में कार्य करने के बाद उन्होंने 1991 में राजनीति में प्रवेश किया और 1993 में गोगुंदा से विधायक निर्वाचित हुए। वे भैरो सिंह शेखावत की सरकार में मंत्री भी रहे।
बाद में सांसद के रूप में वे 22 जुलाई 2008 को संसद में हुए कैश फॉर वोट घोटाले में शामिल रहे, जिसमें 10 करोड़ रुपये संसद में लहराने का मामला सामने आया था। इस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।
पुलिस अब आशीष की निजी और मानसिक स्थिति की जांच कर रही है ताकि आत्महत्या के पीछे के कारणों का पता लगाया जा सके। मामले की विस्तृत जांच जारी है।


